सिजदा और पैबोस क्या है

Sijda Aur पैबोस Kya Hai

Gk Exams at  2020-10-15

Pradeep Chawla on 12-05-2019

पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त पर मंगोल आक्रमण के भय को समाप्त करने के लिए बलबन ने एक सुनिश्चत योजना का क्रियान्वयन किया। उसने सीमा पर कीलों की एकतार बनवायी और प्रत्येक क़िले में एक बड़ी संख्या में सेना रखी। कुछ वर्षो के पश्चात् उत्तर-पश्चिमी सीमा को दो भागों में बांट दिया गया। लाहौर, मुल्तान और दिपालपुर का क्षेत्र शाहज़ादा मुहम्मद को और सुमन, समाना तथा कच्छ का क्षेत्र बुगरा ख़ाँ को दिया गया। प्रत्येक शाहज़ादे के लिए प्रायः 18 हज़ार घुड़सवारों की एक शक्तिशाली सेना रखी गयी। उसने सैन्य विभाग ‘दीवान-ए-अर्ज’ को पुनर्गठित करवाया, इमादुलमुल्क को दीवान-ए-अर्ज के पद पर प्रतिष्ठित किया तथा सीमान्त क्षेत्र में स्थित क़िलों का पुननिर्माण करवाया। बलबन के सिद्धांत व उसकी नीति सल्तनतकालीन राजत्व सिद्धांत का प्रमुख बिन्दू है। उसने दीवान-ए-अर्ज को वज़ीर के नियंत्रण से मुक्त कर दिया, जिससे उसे धन की कमी न हो। बलबन की अच्छी सेना व्यवस्था का श्रेय इमादुलमुल्क को ही था। साथ ही उसने अयोग्य एवं वृद्ध सैनिकों को वेतन का भुगतान नकद वेतन में किया। उसने तुर्क प्रभाव को कम करने के लिए फ़ारसी परम्परा पर आधारित ‘सिजदा’ (घुटने पर बैठकर सम्राट के सामने सिर झुकाना) एवं ‘पाबोस’ (पांव को चूमना) के प्रचलन को अनिवार्य कर दिया। बलबन ने गुप्तचर विभाग की स्थापना राज्य के अन्तर्गत होने वाले षड़यन्त्रों एवं विद्रोह के विषय में पूर्व जानकारी के लिए किया। गुप्तचरों की नियुक्त बलबन स्वयं करता था और उन्हें पर्याप्त धन उपलब्ध कराता था। कोई भी गुप्तचर खुले दरबार में उससे नहीं मिलता था। यदि कोई गुप्तचर अपने कर्तव्य की पूर्ति नहीं करता था, तो उसे कठोर दण्ड दिया जाता था। उसने फ़ारसी रीति-रिवाज पर आधारित नवरोज उत्सव को प्रारम्भ करवाया। अपने विरोधियों के प्रति बलबन ने कठोर ‘लौह एवं रक्त’ नीति का पालन किया। इस नीति के अन्तर्गत विद्रोही व्यक्ति की हत्या कर उसकी स्त्री एवं बच्चों को दास बना लिया जाता था।



Comments Pradeep Kumar on 15-02-2020

Sijda paibosh kya hai

Pabo on 12-01-2020

Pabos vsijda sh kya abepray h

gul on 19-01-2019

gulam vand la antim sask kon tha



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