सरल लोलक का आवर्तकाल

Saral Lolak Ka Awartkaal

Pradeep Chawla on 12-05-2019

लन करता हुआ लोलक किसी एक बिन्दु जितने समय बाद पुनः वापस आ जाता है उसे उसका आवर्तकाल कहते हैं। यदि लोलक का आयाम कम हो तो इसका आवर्तकाल आयाम पर निर्भर नहीं करता बल्कि केवल लोलक की लम्बाई और गुरुत्वजनित त्वरण के स्थानीय मान पर निर्भर होता है। लोलक का आवर्तकाल लोलक के द्रव्यमान पर भी निर्भर नहीं करता।







{displaystyle Tapprox 2pi {sqrt {frac {L}{g}}}qquad qquad qquad heta _{0}ll 1qquad (1),}







जहाँ L लोलक की लम्बाई है, तथा g उस स्थान पर गुरुत्वजनित त्वरण का मान है।







इस सूत्र से साफ है कि यदि आयाम (या स्विंग) कम हो तो आवर्तकाल अलग-अलग आयामों के लिये समान होगा। लोलक के इस गुण को समकालिकता (isochronism) कहते हैं। अपने इसी गुण के कारण लोलक का उपयोग समयमापन (timekeeping) में खूब हुआ।



Comments Secondi lolak on 16-12-2019

Secondi lolak kiss kahte hai

Devid on 29-10-2019

Velocity

Devid on 29-10-2019

Motion ki defination

Haider Ali on 02-10-2018

Ik saral lolak ka aavartkal (T) lolak ke dravyemaan (m) lolak ki lambai (l) and gurutviye tavrad (g) par nirbhar kart hai vimiyi vishleshan ki sahayta se saral lolak ka aavartkal ka vyanjak prapt kijiye



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