राजस्थान का इतिहास कर्नल टॉड

Rajasthan Ka Itihas Karnal Taaud

GkExams on 25-12-2018

सन 1806 ईस्वीं में अपनी फौज की नौकरी के दौरान पहली बार वह उदयपुर पहुँचे। राजपूताना और आसपास के प्रदेशों के टोपोग्राफिकल नक़्शे तैयार करते हुए उन्होंने स्थानीय इतिहास के कई मौखिक और अनगिनत लिखित अभिलेखों से साक्षात्कार किया और तय किया कि वह 'राजपूताना' पर नया ग्रन्थ लिख कर इस के इतिहास का पुनर्लेखन करेंगे।सन 1819 में अक्टूबर में जोधपुर पहुँचे कर्नल टॉड ने वहाँ रह कर पुरातत्व पर गहन शोध-कार्य किया और जाते समय टॉड ने मार्ग में कई मुद्राओं और अभिलेखों का संग्रहण किया जो इतिहास लेखन के लिये अत्यंत उपयोगी स्रोत साबित हुए। बाद में अजमेर, पुष्कर, जयपुर, सीकर, झुंझनू, पाली, मेड़ता आदि स्थानों पर रह कर अपने ग्रन्थ के लिए आधार-सामग्री जुटाई। कड़ी और अनथक मेहनत के बाद 14 जनवरी 1823 को मुम्बई से इनका ग्रन्थ ' ट्रेवल्स इन वेस्टर्न इण्डिया' प्रकाशित हुआ। सन 1829 में इनकी कालजयी रचना 'एनल्स एंड एंटीक्विटीज़ ऑफ़ राजस्थान ' का पहला हिस्सा और सन 1934 में दूसरा खंड प्रकाशित हुआ।


(कर्नल)"टॉड साहब का जीवन-चरित्र" शीर्षक से प्रख्यात इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने एक लम्बा परिचयात्मक निबंध लिखा है, जो कर्नल जेम्स टॉड के इतिहास के (पंडित) गिरिधर शुक्ल द्वारा किये गए हिन्दी अनुवाद में प्रकाशित और पुनः 2012 में 'साहित्यागार' द्वारा प्रकाशित ग्रन्थ 'राजस्थान का इतिहास' (दो खंड) में पुनर्प्रकाशित किया गया है। जो पाठक कर्नल के जीवन की मुख्य घटनाएं और उनकी तिथियाँ या वर्ष जानना चाहें, उनके लिए इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा का यह आलेख पठनीय है।

Captain James Tod mounted on an elephant

कर्नल टॉड और अजमेर का क़स्बा टाडगढ़

कर्नल टॉड सर्वेक्षण के सिलसिले में अजमेर और उदयपुर के कई स्थानों पर रहे थे- उनमें भीम नामक कस्बे के निकट समुद्र तल से 3281 फिट ऊंचाई पर बसा का एक छोटा सा गाँव बोरसवाडा भी था- जो जंगलों और अरावली-पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहाँ से कई किलोमीटर दूर का भूभाग स्पष्ट दिखलाई देता है। उन्हें यह जगह पसंद आई तो उदयपुर के महाराजा भीम सिंह की सहमति से स्वयं के लिए बोरसवाडा में एक छोटा सा किला बनवा लिया। महाराज भीम सिंह ने कर्नल की सेवाओं से प्रभावित हो कर गाँव का नाम टॉडगढ़ रख दिया, जो कालांतर में टाडगढ़ कहलाने लगा। टाडगढ़ आज अजमेर जिले की एक तहसील का मुख्यालय है। कर्नल टॉड के किले में आज एक सरकारी स्कूल चलता है।



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