राजस्थान की नदियों के प्रश्न

Rajasthan Ki Nadiyon Ke Prashn

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 29-10-2018


●- चम्बल एंवम माही को छोड़कर राजस्थान की अन्य कोई नदी बारहमासी नहीं हैं।


●- चम्बल नदी को राजस्थान की कामधेनु भी कहा जाता हैं।


●- चम्बल नदी राजस्थान एंवम मध्य प्रदेश की सीमाबनाती हैं।


●- भैंसरोडगढ के निकट चम्बल नदी चूलिया जलप्रपात का निर्माण करती हैं।


●- पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली नदी बनास हैं।


●- बाणगंगा नदी के किनारे प्राचीन बैराठ सभ्यता विकसित हुई थी।


●- बींगोद के समीप बनास,मेनाल एंवम बेडच नदियों का संगम त्रिवेणी कहलाता हैं।


●- चम्बल एंवम लूणी नदी के प्राचीन नाम क्रमशः चर्मण्वती एंवम लवणवती हैं।


●- लूणी नदी का जल बालोतरा तक मीठा एंवम बाद में खारा हैं।

●- माही नदी को आदिवासियों की गंगा,कांठल की गंगा,बांगड़ की गंगा और दक्षिण राजस्थान की स्वर्ण रेखा भी कहा जाता हैं।


●- माही नदी कर्क रेखा को दो बार पार करती हैं।


●- माही नदी डूंगरपुर एंवम बांसवाड़ा की सीमा बनाती हैं।


●- माही,सोम एंवम जाखम के संगम स्थल पर माघ माह की पूर्णिमा को मेले का आयोजन किया जाता हैं जो आदिवासियों के कुम्भ के नाम से प्रसिद्ध हैं।


●- कालीबंगा सभ्यता घग्घर नदी के किनारे विकसित हुई थी।


●- घग्घर नदी को मृत नदी के नाम से भी जाना जाता हैं।


●- काँकनी नदी को स्थानीय भाषा में मसुरदी नदी के नाम से भी जाना जाता हैं।


●- निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ सलेमाबाद रूपनगढ़ नदी के किनारे स्थित हैं।


●- बीकानेर एंवम चुरू जिले में कोई नदी प्रवाहित नहीं होती हैं।


●- अधिक वर्षा के कारण घग्घर नदी का प्रवाह पाकिस्तान के फोर्ट अब्बास तक चला जाता हैं।


●- गुजरात की मुख्य नदी साबरमती उदयपुर जिले से निकलती हैं।


●- बेडच नदी को प्राचीन कालमें आयड़ नदी के नाम से जाना जाता था।


Pradeep Chawla on 29-10-2018


●- चम्बल एंवम माही को छोड़कर राजस्थान की अन्य कोई नदी बारहमासी नहीं हैं।


●- चम्बल नदी को राजस्थान की कामधेनु भी कहा जाता हैं।


●- चम्बल नदी राजस्थान एंवम मध्य प्रदेश की सीमाबनाती हैं।


●- भैंसरोडगढ के निकट चम्बल नदी चूलिया जलप्रपात का निर्माण करती हैं।


●- पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली नदी बनास हैं।


●- बाणगंगा नदी के किनारे प्राचीन बैराठ सभ्यता विकसित हुई थी।


●- बींगोद के समीप बनास,मेनाल एंवम बेडच नदियों का संगम त्रिवेणी कहलाता हैं।


●- चम्बल एंवम लूणी नदी के प्राचीन नाम क्रमशः चर्मण्वती एंवम लवणवती हैं।


●- लूणी नदी का जल बालोतरा तक मीठा एंवम बाद में खारा हैं।

●- माही नदी को आदिवासियों की गंगा,कांठल की गंगा,बांगड़ की गंगा और दक्षिण राजस्थान की स्वर्ण रेखा भी कहा जाता हैं।


●- माही नदी कर्क रेखा को दो बार पार करती हैं।


●- माही नदी डूंगरपुर एंवम बांसवाड़ा की सीमा बनाती हैं।


●- माही,सोम एंवम जाखम के संगम स्थल पर माघ माह की पूर्णिमा को मेले का आयोजन किया जाता हैं जो आदिवासियों के कुम्भ के नाम से प्रसिद्ध हैं।


●- कालीबंगा सभ्यता घग्घर नदी के किनारे विकसित हुई थी।


●- घग्घर नदी को मृत नदी के नाम से भी जाना जाता हैं।


●- काँकनी नदी को स्थानीय भाषा में मसुरदी नदी के नाम से भी जाना जाता हैं।


●- निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ सलेमाबाद रूपनगढ़ नदी के किनारे स्थित हैं।


●- बीकानेर एंवम चुरू जिले में कोई नदी प्रवाहित नहीं होती हैं।


●- अधिक वर्षा के कारण घग्घर नदी का प्रवाह पाकिस्तान के फोर्ट अब्बास तक चला जाता हैं।


●- गुजरात की मुख्य नदी साबरमती उदयपुर जिले से निकलती हैं।


●- बेडच नदी को प्राचीन कालमें आयड़ नदी के नाम से जाना जाता था।



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