कम्युनल अवार्ड क्या था

communal Award Kya Tha

GkExams on 12-05-2019

कम्युनल अवार्ड के द्वारा दलितों व् अल्पसंख्यकों के लिए भी प्रतिनिधित्व का अधिकार देने का प्रयास किया था जो की डॉ. बी.आर. अम्बेडकर साहब के प्रयासों का नतीजा था, जिसका विरोध हिंदुओं ने किया जो अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को तो स्वीकार कर सकते थे पर दलितों को अधिकार नहीं देना चाहते थे क्योंकि वो उन्हें अपना खानदानी गुलाम समझते थे और इस मानसिकता से आज भी कई हिन्दू उभर नहीं पा रहे हैं।



कम्युनल अवार्ड के माध्यम से अछूतों को जो पृथक निर्वाचन के रूप में अपने प्रतिनिधि स्वयं चुनने और दोहरे वोट के अधिकार से सवर्ण हिन्दुओं की भी दलितों पर निर्भरता से दलितों का स्वंतत्र राजनीतिक अस्तित्व सुरक्षित रह सकता था परन्तु पूना पैक्ट करने की विवशता ने दलितों को फिर से स्वर्ण हिन्दुओं का गुलाम बना दिया. इस व्यवस्था से आरक्षित सीटों पर जो सांसद या विधायक चुने जाते हैं वे वास्तव में दलितों द्वारा न चुने जा कर विभिन्न राजनैतिक पार्टियों एवं सवर्णों द्वारा चुने जाते हैं जिन्हें उन का गुलाम/ बंधुआ बन कर रहना पड़ता है. सभी राजनैतिक पार्टियाँ गुलाम मानसिकता वाले ऐसे प्रतिनिधियों पर कड़ा नियंत्रण रखती हैं और पार्टी लाइन से हट कर किसी भी दलित मुद्दे को उठाने या उस पर बोलने की इजाजत नहीं देतीं. यही कारण है कि लोकसभा तथा विधान सभायों में दलित प्रतिनिधियों कि स्थिति महाभारत के भीष्म पितामह जैसी रहती है जिस ने यह पूछने पर कि ” जब कौरवों के दरबार में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था तो आप क्यों नहीं बोले?” इस पर उन का उत्तर था, ” मैंने कौरवों का नमक खाया था.”

वास्तव में कम्युनल अवार्ड से दलितों को स्वंतत्र राजनैतिक अधिकार प्राप्त हुए थे जिससे वे अपने प्रतिनिधि स्वयं चुनने के लिए सक्षम हो गए थे और वे उनकी आवाज़ बन सकते थे. इस के साथ ही दोहरे वोट के अधिकार के कारण सामान्य निर्वाचन क्षेत्र में सवर्ण हिन्दू भी उन पर निर्भर रहते और दलितों को नाराज़ करने की हिम्मत नहीं करते. इस से हिन्दू समाज में एक नया समीकरण बन सकता था जो दलित मुक्ति का रास्ता प्रशस्त करता. परन्तु गाँधी जी ने हिन्दू समाज और हिन्दू धर्म के विघटित होने की झूठी दुहाई दे कर तथा आमरण अनशन का अनैतिक हथकंडा अपना कर दलितों की राजनीतिक स्वतंत्रता का हनन कर लिया जिस कारण दलित सवर्णों के फिर से राजनीतिक गुलाम बन गए. वास्तव में गाँधी जी की चाल काफी हद तक राजनीतिक भी थी जो कि बाद में उनके एक अवसर पर सरदार पटेल को कही गयी इस बात से भी स्पष्ट है:



Comments Birju hembrom on 24-03-2021

कमयूनल अवार्ड क्या है?

Chandan gupta on 24-02-2021

अभिलेख क्या है

Golmej sammelan kya tha on 15-01-2021

Yas

Priya on 05-12-2020

What was the communal award

Shradha on 01-12-2020

What is communal award ?

Hanif hanslod on 06-10-2020

कम्युनल अवॉर्ड मे क्या क्या चीजे थी?


Sanjay on 15-04-2019

dr ambedkar ne booddh dharm hi kyo apnaya

Vijay sen on 25-09-2018

आप का लेख अच्छा लगा



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