वित्त आयोग के क्या कार्य है

Vitt Aayog Ke Kya Karya Hai

GkExams on 26-12-2018

भारत के संविधान में अनुच्छेद 280 के अंतर्गत अर्ध न्यायिक निकाय के रूप में इसकी व्याख्या की गई है। इसका गठन राष्ट्रपति हर 5वे वर्ष या आवश्यकतानुसार उससे पहले भी कर सकता है। इसकी स्थापना 24 नवंबर 1951 में हुई थी।


संरचना-

  1. इसमें एक अध्यक्ष व चार अन्य सदस्य होते हैं।
  2. इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
  3. इनकी पुनर्नियुक्ति भी हो सकती है
  4. इनका कार्यकाल राष्ट्रपति के आदेश के तहत तय होता है।

योग्यताएं– इसका अध्यक्ष सार्वजनिक मामले का अनुभवी होना चाहिए और चार सदस्यों को निम्नलिखित में से चुना जाना चाहिए-

  1. किसी उच्च न्यायालय का न्यायधीश या इस पद के लिए योग्य व्यक्ति
  2. ऐसा व्यक्ति जिसे भारत के लेखा एवं विज्ञान का अनुभव हो
  3. ऐसा व्यक्ति जो अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञाता हो।

इसके कार्य– वित्त आयोग राष्ट्रपति को निम्नलिखित मामलों पर सिफारिश करता है-

  1. संघ एवं राज्यों के बीच करो के शुद्ध आगामोें का वितरण और राज्यों के बीच ऐसे आगामों का आवंटन।
  2. भारत की संचित निधि से राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान को शासिक करने वाले सिद्धान्त
  3. तथा सुदृण वित्त के हित में निर्दिष्ट कोई अन्य विषय।



आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सोंपता है जो इसे संसद के दोनों सदनों में रहता है। वित्त आयोग की सिफारिशों की प्रकृति सलाहकारी होती है और इनको मानने के लिए सरकार बाध्य नहीं है। यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वह राज्य सरकार को दी जाने वाली सहायता के संबंध में आयोग की सिफारिशों को लागू करे। यह एक संविधानिक निकाय है जो अर्ध न्यायिक कार्य करता है तथा भारत सरकार इसकी सलाह को तब तक मानने के लिए बाध्य नहीं हैं जब तक कोई बाध्यकारी कारण ना हो।





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