बेणेश्वर धाम का इतिहास

Benneshwar Dham Ka Itihas

Gk Exams at  2018-03-25

Pradeep Chawla on 12-05-2019

भूत, भविष्य और वर्तमान की पीढ़ियों के लिए किसी न किसी रूप में ख़ास महत्व रखने वाला बेणेश्वर और इसकी परम्पराएं भी मनोहारी हैं। संत मावजी महाराज एवं बेणेश्वर की पुरातन धार्मिक परम्पराओं में कई वैज्ञानिक रहस्य समाहित हैं। इन परम्पराओं के पीछे चमत्कार और दैवीय शक्तियों की ऊर्जा पग-पग पर देखने को मिलती है।


जब आबूदर्रा से उधार लिया शुद्ध घी


सन् 1958 में बड़लिया महाराज के नाम से मशहूर संत भोलानाथ ने बेणेश्वर धाम पर सुवृष्टि के लिए इन्द्र यज्ञ किया। इसका आचार्यत्व किया पं. भवानीशंकर भट्ट ने। तब हवन के लिए शुद्ध घी कम पड़ गया। ऎसे में बड़लिया महाराज ने आबूदर्रा संगम तीर्थ में से कई डिब्बे भर कर लाने को कहा। जब यज्ञ मण्डप में इन डिब्बों को देखा गया तो इनमें शुद्ध घी भरा था। यज्ञ पूर्ण हो जाने के बाद में शुद्ध घी मंगवा कर आबूदर्रा को वापस सौंपा गया। बेणेश्वर के अष्टम पीठाधीश्वर महन्त देवानन्द जी महाराज ने 21 मई 1964 को यहां पंचकुण्डी यज्ञ करवाया था।


कटारा क्षेत्र


वागड़ के जिस भू भाग को माही, सोम और जाखम नदियों ने कटार के समान काटा, उससे यह कटारा उप प्रदेश बन गया।


सोम देती है अमृत


लोक मान्यता है कि बेणेश्वर त्रिवेणी संगम से जुड़ी नदी सोम यदि पहले पूर्ण प्रवाह के साथ बहे तो उस वर्ष साल(चावल) की फसल अच्छी पकती है। जबकि माही में जल प्रवाह पहले होने पर समय ठीेक नहीं माना जाता।






Comments Mavaji ki bhavisvani on 23-03-2020

Mavji maraj ki bhavisvani

Anil Tatiwal on 26-01-2020

Baneshva dam h

सुरेश विशनोई विशनपुरा जालोर on 12-05-2019

बेणेशवर धाम का निर्माण किसने करवाया था



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