बिरसा मुंडा के विचार

Birsa Munda Ke Vichar

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 24-11-2018

'हिन्दूधर्म पर बिरसा मुन्डा के विचार एवं उनके संदेश:
✒ तुम हिन्दू कभी नहीं थे, तुम आज भी
हिन्दू नहीं हो।
✒ तुम हिन्दू धर्म के गुलाम हो।
✒ तुम्हें धर्म का भी गुलाम बना लिया
गया है।
✒ हिन्दू धर्म छोड़ना धर्म परिवर्तन
नहीं बल्कि गुलामी की जंजीरे तोड़ना है।
जाति के अधार पर किसी को ऊँचा
मानना पाप है और नीचा मानना
महापाप।
✒ हिन्दू धर्म की आत्मा वर्ण जाति और
ब्रह्मण हितेषी कर्मकांडो मैं है।
✒ वर्ण और जाति के बिना हिन्दू धर्म की
कल्पना ही नहीं की जा सकती है।
✒ हिन्दू धर्म मे कर्म नहीं जाति प्रधान है।
✒ हिन्दू धर्म वर्णों का है तुम किसी भी
वर्ण मैं नहीं आते हो, जबरदस्ती सबसे नीचे
वर्ण मैं रखा गया है।
✒ हिन्दू धर्म के कर्मकांडों को तुम्हे नहीं
करने दिया गया और तुम नहीं कर सकते हो।
✒ हिन्दु धर्म के भगवान उनके अवतार और
उनके देवी देवता ना तो तुम्हारे हैं और न तुम
उनके हो।
✒ इसलिए वे तुम्हारे साये से भी परहेज करते
आये हैं और आज भी कर रहे हैं।
✒ कुत्ते बिल्ली की पेशाब से उन्हें कोई
परहेज नहीं है परन्तु तुम्हारे द्वारा दिए गए
गंगा जल से अपवित्र
हो जाते हैं।
✒ उनकी पुनः शुद्धि गाय के मल-मूत्र से
होती है।
✒जब तक तुम हिन्दू रहोगे तुम्हारा स्थान
सबसे नीचा रहेगा।
✒याद रखो हिन्दू धर्म के देवी देवताही
तुम्हारे पूर्वजों के हत्यारे हैं!
✒धर्म मनुष्य के लिए है मनुष्य धर्म के लिए
नहीं और जो धर्म तुम्हें इन्सान नही समझता
वह धर्म नहीं अधर्म का बोझ है |
✒जहाँ ऊँच और नीच की व्यवस्था है, वह
धर्म नही,गुलाम बनाये रखने की साजिश
है।



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