भारत के भूकंप प्रभावित क्षेत्र

Bharat Ke Bhukamp Prabhavit Shetra

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 28-09-2018

भारतीयउपमहाद्वीपमेंविनाशकारीभूकंपों का लम्‍बा इतिहासरहा है।भूकंपों कीअत्यधिकआवृत्ति औरतीव्रता कामुख्य कारण यहहै कि भारततकरीबन 47मिलीमीटरप्रति वर्ष कीगति से एशियासे टकरा रहाहै। भारत काकरीब 54प्रतिशतहिस्सा भूकंपकी आशंका वालाहै। भारत केभूकंपीयक्षेत्रीकरणमानचित्र केनवीनतमसंस्करण मेंक्षेत्रवारखंडों मेंभूकंप के चारस्तर बताए गएहैं। भारतीयमानक ब्यूरो(आईएस-1893 (भाग-1): 2002) नेअनेकएजेंसियों सेप्राप्तविभिन्नवैज्ञानिकजानकारियोंके आधार परदेश को चारभूकंपीयक्षेत्रों याजोन यानी जोन-2, 3, 4, और 5में बांटा है।जबकि इसकेविपरीतपूर्ववर्तीसंस्करण मेंदेश को पांचक्षेत्रों याजोन में बांटागया है।


इनमेंसे जोन 5भूकंपीयदृष्टि सेसबसे ज्यादासक्रिय क्षेत्रहै। इसकेदायरे मेंसबसे अधिकखतरे वाला क्षेत्रआता है जिसमें9 या उससेज्यादातीव्रता केभूकंप आतेहैं। आईएस जोनकोड, जोन 5 के लिए 0.36 जोनफैक्टरनिर्धारितकरता है। ढांचागतनिर्माण सेजुड़े डिजाइनरजोन 5 मेंभूकंपरोधीढांचों केडिजाइन के समयइस फैक्टर काइस्तेमालकरते हैं। 0.36 का जोनफैक्टर इस बातकी ओर संकेतकरता है कि इसजोन में एमसीईस्तर का भूकंपआने पर 0.36 जी (36 प्रतिशतगुरुत्वाकर्षण)काप्रभावशालीशीर्षक्षैतिज भूमित्वरण (पीक होरिजेंटल ग्राउंड एक्सीलरेशन) उत्पन्नहो सकता है।इसे बहुत अधिकतबाही के खतरेवाला जोन कहाजाता है।


मोटे तौर पर जोन-5में पूरा पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड गुजरात में कच्छ का रन, उत्तर बिहार का कुछ हिस्सा और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल है। आमतौर पर उन इलाकों में भूकंप का खतरा ज्यादा होता है जहां ट्रैप या बेसाल्ट की चट्टानें होती हैं।


जोन-4 अधिकतबाही के खतरेवाला क्षेत्रकहा जाता है।आईएस कोड, जोन 4 केलिए 0.24 जोनफैक्टरनिर्धारितकरता है। जोन-4 मेंजम्मू-कश्मीरऔर हिमाचलप्रदेश केबाकी हिस्से, दिल्ली, सिक्किम, उत्तरप्रदेश केउत्तरी भाग, सिंधु-गंगाथाला, बिहारऔर पश्चिमबंगाल, गुजरातके कुछ हिस्सेऔर पश्चिमी तटके समीप महाराष्ट्रका कुछ हिस्साऔर राजस्थानशामिल है। दिल्लीमें भूकंप कीआशंका वाले इलाकोंमें यमुना तटके करीबीइलाके, पूर्वीदिल्ली, शाहदरा, मयूरविहार, लक्ष्मीनगर औरगुड़गांव, रेवाड़ीतथा नोएडा केनजदीकीक्षेत्रशामिल हैं।


जोन-3 कोसामान्यतबाही के खतरेवाले क्षेत्रकी श्रेणी मेंरखा गया है जोएमएसके-7 (मेदवेदेवस्पॉनहरकार्निकपैमाना) के अधीनहै। आईएस जोनकोड, जोन 3 के लिए 0.16 जोनफैक्टरनिर्धारितकरता है। जोन-3 में केरल, गोवा, लक्षद्वीपद्वीपसमूह, उत्तरप्रदेश केबाकी हिस्से, गुजरात औरपश्चिम बंगाल, पंजाब केहिस्से, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओड़ीसा, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडुऔर कर्नाटकशामिल हैं।


जोन-2 भूकंप कीदृष्टि सेसबसे कमसक्रियक्षेत्र है।यह क्षेत्रएमएसके-6 याउससे भी कम केतहत आता है औरइसे सबसे कमतबाही के खतरेवाले क्षेत्रकी श्रेणी मेंरखा गया है।आईएस कोड, जोन 2 केलिए 0.10 जोनफैक्टर निर्धारितकरता है। यानीजोन-2 मेंकिसी ढांचे परअसर डाल सकनेवाली अत्यधिकक्षैतिजतीव्रतागुरुत्वाकर्षणीयतीव्रता का 10 प्रतिशतहोती है। जोन-2 में देशका बाकीहिस्सा शामिलहैं।


धरतीकी सतह परभूकंपों केप्रभाव कोमापने वालीमॉडीफाइडमर्काली(एमएम)तीव्रता मुख्य रूप सेविभिन्न जोनके साथनिम्नलिखितढंग से संबध्दहै :



भूकंपीयजोन एमएम पैमानेपर तीव्रता



2-(कमतीव्रता वालाजोन) 6 (या कम)


3-(सामान्यतीव्रता वालाजोन) 7


4-(अधिकतीव्रता वालाजोन) 8


5-(बहुतअधिक तीव्रतावाला जोन) 9 (औरउससे अधिक)





Comments Jyoti on 12-05-2019

Kya Jaipur bhukamp danger zone may Hai



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