राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर

Rajasthan Lok Sewa Aayog Ajmer

Gk Exams at  2020-10-15

Pradeep Chawla on 12-05-2019







राजस्‍थान लोक सेवा आयोग का अभूतपूर्व

इतिहास है। वर्ष 1923 में ली कमिशन ने भारत में एक संघ लोक सेवा आयोग की

स्‍थापना की सिफारिश की थी किन्‍तु इस कमिशन

ने प्रांतो में लोक सेवा आयोगों की स्‍थापना के बारें में

कोई विचार नहीं किया। प्रांतीय सरकारे अपनी आवश्‍यकतानुसार नियुक्तियां

करने एवं राज्‍य सेवा नियम बनाने हेतु स्‍वतंत्र थी।



राजस्‍थान राज्‍य के गठन के समय कुल 22 प्रांतों में

से मात्र 3 प्रांत-जयपुर, जोधपुर एवं बीकानेर में ही लोक सेवा आयोग कार्यरत

थे ।

रियासतों के एकीकरण के बाद गठित राजस्‍थान राज्‍य के

तत्‍कालीन प्रबंधन ने 16 अगस्‍त, 1949 को एक अध्‍यादेश के अधीन राजस्‍थान

लोक सेवा आयोग की स्‍थापना की ।

इस अध्‍यादेश का प्रकाशन राजस्‍थान के राजपत्र में 20

अगस्‍त 1949 को हुआ और इसी तिथी से अध्‍यादेश प्रभाव में आया ।

इस अध्‍यादेश के द्वारा राज्‍य में कार्यरत अन्‍य लोक

सेवा आयोग एवं लोक सेवा आयोग की तरह कार्यरत अन्‍य संस्‍थाऐं बंद कर दी गयी



अध्‍यादेश में आयोग के गठन, कर्मचारीगण एवं आयोग के

कार्यो संबधित नियम भी तय किये गये ।



आंरभिक चरण में आयोग में एक अध्‍यक्ष एवं दो सदस्‍य थे

। राजस्‍थान के तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीरा सर एस.के. घोष को अध्‍यक्ष

नियुक्‍त किया गया ।

तत्‍पश्‍चात श्री देवीशंकर तिवारी एवं श्री एन.आर.

चन्‍दोरकर की नियुक्‍ती सदस्‍यों के रूप में एवं संघ लोक सेवा आयोग के

पूर्व सदस्‍य श्री एस.सी. त्रिपाठी, आई.ई.एस की नियुक्‍ती अध्‍यक्ष के रूप

में की गयी ।

वर्ष 1951 में आयोग के कार्यो को नियमित करने के

उद्देश्‍य से राज प्रमुख द्वारा भारत के संविधान के अनुसार निम्‍न नियम

पारित किये गये-



1. राजस्‍थान लोक सेवा आयोग सेवा की शर्ते नियम, 1951 एवं


2. राजस्‍थान लोक सेवा आयोग कार्यो की सीमा नियम, 1951




लोक सेवा आयोगों के द्वारा सम्‍पादित किये जाने वाले

महत्‍वपूर्ण कार्यो एवं उनकी निष्‍पक्ष कार्य प्रणाली के कारण भारतीय

संविधान में इनका महत्‍वपूर्ण स्‍थान है ।

अनुच्‍छेद संख्‍या 16, 234, 315 से 323 तक विशेष रूप से

लोक सेवा आयोगों के कार्य एवं अधिकार क्षेत्र के संबंध में है ।

राजस्‍थान लोक सेवा आयोग की कार्य प्रणाली राजस्‍थान लोक

सेवा आयोग नियम एवं शर्ते, 1963 एवं राजस्‍थान लोक सेवा आयोग

(शर्ते एवं प्रक्रिया का मान्‍यकरण अध्‍यादेश 1975 एवं

नियम 1976) के द्वारा तय की जाती है ।






Rajasthan Public Service Commission had

a glorious past of nearly 50 years.

During 1923, the Lee Commission had recommended setting

up of a Central Public Service Commission in India,

but it did not give much thought to the need of

establishing similar commissions in provinces.

It was left largely to the discretion of provincial

Governments to recruit and exercise control over their Services, as they

thought proper.




At the time of formation of Rajasthan, the institution

of Public Service Commission existed in only three of the 22 covenanting

states viz. Jaipur, Jodhpur and Bikaner.

The successor administration after the merger of the

princely states promulgated an ordinance on 16th August,1949

establishing the

Rajasthan Public Service Commission Ajmer. It was

published in Raj. Gazette at 20th August, 1949 and it came into effect

from this date.

It provided for the abolition of the PSCs or other

institution performing duties in the nature of those of a PSC in the

constituent states.

The ordinance also provided inter-alia, for the

composition of the Commission, the staff and the functions of the

Commission.




Initially the composition of the Commission was one

Chairman and 2 Members. Sir S.K.Ghosh (also the then Chief Justice of

Rajasthan) was appointed Chairman.

Subsequently Shri DeviShankar Tiwari and Shri

N.R.Chandorkar were appointed Members and Shri S.C. Tripathi (I.E.S),

formerly a member of the

Federal PSC was appointed as Chairman.

In the year 1951, in order to regulate the working of

the Commission, the Rajpramukh issued the following Regulations under

the provisions

of the Constitution of India.



1. The Rajasthan Public Service Commission (Conditions of Service) Regulation,1951 and


2. The Rajasthan Public Service Commission (Limitation of Functions) Regulation,1951.




In view of its important and impartial function, Public

Service Commissions rightly find a place of pride in the Indian

Constitution.

Articles 16, 234, 315 to 323 deal with various functions

and powers of the Public Service Commissions.

The working of Rajasthan Public Service Commission is

also regulated by Rajasthan Public Service Commission Rules &

Regulation, 1963,

Rules framed by the Rajasthan Public Service Commission

for conduct of their Business and the Rajasthan Public Service

Commission (Regulations and validation of Procedure ordinance 1975 &

Act 1976).







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