सहभागी नियोजन क्या है

SahBhaagi Niyojan Kya Hai

Gk Exams at  2018-03-25


Go To Quiz

GkExams on 15-02-2019

साधारणत: जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को कब करना है ? कैसे करनाहै ? कहां करना हैं ? और किस रूप में करना है आदि प्रश्नों को विचार करताहै तो एक विभिन्न विकल्पों में से किसी एक निर्णय पर पहुचता है उसे ही नियोजनकहते है साधारण शब्दो में भविष्य के कार्यों का वर्तमान मे निर्धारण नियोजन हैं।एम.ई.हर्ले के शब्दों में-’योजना का अर्थ है भविष्य में किए जाने वाले काम के बारे में पहले से निर्धारित करना इसमें उद्देश्यों, नीतियो कार्यक्रमों तथा कार्यविधियेा का उनकेविभिन्न विकल्पों में से चयन करना हैं’’।

नियोजन की विशेषताएं या प्रकृति -

  1. निश्चित लक्ष्य का निर्धारण-नियोजन के लिए कुछ निश्चित लक्ष्यों का निर्धारण होना आवश्यक है इसी के आधार पर ही योजनाएं तैयार की जाती है और इससे लक्ष्यों की प्राप्ति में सुगमता होती है।
  2. सर्वोत्तम विकल्प का चयन-योजना बनाते समय विभिन्न विकल्पा ें को तैयार कर उनकी तुलना कीजाती हैं, तत्पश्चात् उनमें से श्रेष्ठ का चुनाव कर कार्य हेतु योजनायें एवं नीतियॉंबनाई जाती हैं।
  3. प्रबध की प्रारंभिक क्रिया- प्रबंध के लिए विभिन्न कार्यो में से प्रथम प्रक्रिया नियोजन का क्रिया हैइसके पश्चात् ही प्रबंध के कार्य प्रारंभ हो सकती है।
  4. उद्देश्य का आधार-नियोजन संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाया जाता है उद्देश्यों कीपूर्ति के लिए जिस-जिस कार्यो को करना होता है, उसी के संदर्भ में नियोजनकिया जाता है नियोजन निर्माण का उद्देश्य संस्था के उद्देश्यों की कम से कमलागत एवं अधिकतम सफलता की प्राप्ति के लिए किया जाता है
  5. सर्वव्यापकता-सम्पूर्ण प्रबंन्ध में नियेाजन व्याप्त है, प्रबन्ध के प्रत्येक क्षेत्र में नियेाजन काअस्तित्व है, प्रत्येक प्रबन्धक को योजनाये बनानी पड़ती है। इसी प्रकार फोरमेन भीअपने स्तर पर योजनायें बनाता है अत: यह सर्वव्यापी है।
  6. लोचता-योजना में लोच का गुण अवश्य रहता है, अर्थात आवश्यकतानुसार उसमेंपरिवर्तन करना पड़ता है, योजनायें जितनी लचीली होंगी, योजना उतनी सफलहोती है अत: योजना में लोचता होनी चाहिए।
  7. बौद्धिक प्रक्रिया-नियोजन निश्चित रूप से एक बौद्धिक प्रक्रिया है चुंकि विभिन्न विकल्पों मेंकिसी श्रेष्ठ विकल्प का चयन करना होता है जो कि तर्को सिद्धांतो एवं संस्था किहितो को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता है। नियेाजन के संदर्भ को कून्ट्ज एवंओ डोनेल ने भी स्वीकार किया है और इसे एक बौद्धिक प्रक्रिया माना है।
  8. निरंतर चलने वाली प्रक्रिया-यह एक निरंतर रूप से चलने वाली प्रक्रिया है जो कि अनेक कार्यो के लिएव्यापार के विकास के साथ-साथ हर कार्यो हर स्तरों निर्माण विकास एवं विस्तारके लिए इसकी आवश्कता होती है अत: यह एक न रूकने वाली सतत् प्रक्रिया है।
  9. अन्य-
    1. नियोजन अंतर विभागीय क्रिया है।
    2. नियोजन से कार्यकुशलता मे वृद्धि होती है।
    3. नियेाजन एक मार्गदर्शन है।

नियोजन का महत्व, आवश्यकता या लाभ

  1. लक्ष्य प्राप्ति में सहायक-नियोजन की शुरूआत लक्ष्य से होती है इन लक्ष्यों को तभी प्राप्त किया जासकता है जब उपक्रम की समस्त क्रियाएॅं पूर्व नियोजित हो जिससे कि प्रत्येक कार्यव्यस्थित व सही समय पर पूर्ण किया जा सके।
  2. साधनों का सर्वोत्तम उपयोग-नियेाजन निर्माण के समय संस्था में प्रयुक्त साधनों के विकल्पो पर विचारकरते हुए सर्वोत्तम का प्रयोग किया जाता है जो कि योजना का एक भाग होताहै इस प्रकार उत्पादन के प्रभावशाली साधनों का नियोजन के माध्यम से सर्वोत्तमप्रयोग का अवसर प्राप्त होता है।
  3. न्यूनतक लागत-नियेाजन के माध्यम से चयनित विकल्पों के कारण उत्पादन के लागत मेकमी करने में सहायता प्राप्त होती है नियेाजन के द्वारा अनुपात्दक एव अनावश्यकक्रियाओं को समाप्त करते हुए सीमित साधनों का सदुपयोग करने से लागत मे भीस्वत: कमी आती है।
  4. मनोबल में वृद्धि-नियेाजन की प्रक्रिया के अंतर्गत विभिन्न विकल्पों में से श्रेष्ठ विकल्पों केचयन से अधिकारी एवं कर्मचारी के मध्य आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सफलतापूर्वक संस्था के कार्य को संपादित करते है।
  5. निर्णय लेने में सुविधा-नियोजन से प्रबंधको को निर्णय करने मे दिशा प्राप्त होती है लक्ष्य प्राप्तिके लिए कार्य प्रणाली को ध्यान में रखकर तैयार की गई योजना से लक्ष्य हासिलकरने और कार्य योजना संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करने में मदद मिलती है।
  6. समन्वय एवं नियंत्रण-नियोजन से समन्वय प्राप्त करने और नियंत्रण में मदद मिलती है सहीतरीके से तैयार की गई योजना में कार्यप्रणाली के बारे में निर्देश निहित होते है।इससे समन्वय अधिक प्रभावशाली होता है इससे विचलनों की पहचान करने औरसुधारात्मक कार्यवाही करने मे ंसहायता मिलती है।
  7. परिवर्तनुसार विकास-लचीली योजनाएं हमेशा संगठन के लिए स्वीकार्य होती हैं दूसरे शब्दों मेंकहें तो योजना से किसी भी संगठन को बदलती स्थितियों और वातावरण केअनुरूप तालमेल बिठाने में मदद मिलती है।
  8. भावी अनिश्चितता में कमी-नियेाजन से क्रियाकलापों में अनिश्चितताएं, जोखिम और भ्रामक स्थितियांकम हो जाती हैं योजना के माध्यम से हर किसी को इस बात का पता चलता हैकि भविष्य में क्या करना है इसलिए हर किसी को यह पता होता है कि वास्तवमें क्या करने की आवश्यकता है इससे एक प्रकार का दिशा-निर्देश प्राप्त होता हैपरिणामस्वरूप कार्य प्रणाली में गतिशीलता आती है।
  9. अन्य-
    1. न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन की प्राप्ति के लिए।
    2. अभिप्रेरणा का लाभ प्राप्त करने के लिए।
    3. अधिकारों का भार्रापण हेतु।
    4. कुशल संप्रेषण हेतु।
    5. राष्ट्र समाज व शैक्षणिक सस्ं थाओं के लिए भी नियोजन महत्वपूर्ण है।

नियोजन की सीमाए या कठिनाईयॉ या बाधाए

  1. सर्वोत्तम विकल्प के चुनाव में कठिनाई आती हैं।
  2. निर्णायक योजना बनाना एक कठिन कार्य है। क्योंकि भविष्य अनिश्चितहोने के कारण अनेक समस्याएॅं एवं बाधाएॅं आती है।
  3. कुशल एवं अनुभवी नियोजकों के अभाव में श्रेष्ठ योजना बनान कठिन होताहै।
  4. समय व्यय:- कई बार नियेाजन निर्माण मे समय लग जाता है और कभीबने हुए नियोजन को लागू करने में विलंब हो जाता हे परिणामत: येाजनाकी सफलता संदिग्ध हो जाती है।

नियोजन की प्रक्रिया या तकनीक

किसी भी संगठन में योजना प्रक्रिया का चरणबद्ध तरीके से अनुसरण कियाजाता है इसके बिना सही योजनाओं को तैयार करने और उनके क्रियान्वयन मेंकठिनाइयां पैदा हो सकती हैं ये चरण हैं।


  1. लक्ष्य निर्धारण-हम सब जानते हैं कि हर संगठन का कोई न कोई लक्ष्य होता है, जिसे वहप्राप्त करने की कोशिश करता है योजना की शुरूआत दरअसल, अधिक ठोस,स्पष्ट रूप में इन्हीं लक्ष्यों को परिभाषित करने से होती है इससे प्रबंधन को यहसमझने में आसानी होती है कि उन्है। किन लक्ष्यों को पा्र प्त करना है। और फिर वेउन्हीं के अनुरूप गतिविधियों को निर्धारण करते हैं इस प्रकार से संगठन के लक्ष्योंका निर्धारण एक अच्छी और सार्थक योजना की पहली आवश्यकता होती है।
  2. पूर्वानुमान लगाना-लक्ष्यों का निर्धारण हो जाने के बाद पूर्वानुमान लगाया जाता है, इस हेतुविभिन्न ऑंकड़ों, प्रवृतियों व परम्पराओं को ध्यान में रखा जाता है व्यवसाय कापूर्वानुमान मौसम, बाजार व अन्तर्राष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी निर्भर है, अत: पूर्वानुमानके समय इन सभी बातों पर ध्यान दिया जाता है पूर्वानुमान के अन्तर्गत पारिश्रमिककी दर, क्रय की दर व मात्रा, विक्रय नीति व विक्रय मात्रा, पूॅंजी की स्थिति,लाभांश वितरण, लाभ आदि के संदर्भ मे पूर्वानुमान लगाया जाता है, पूर्वानुमानभावी परिस्थितियों के बारे में किये जाते हैं, पूर्वानुमान लगाते समय इस बात काध्यान रखा जाता है कि पूर्वानुमान सत्यता से अधिक दूर न जाये पूर्वानुमान लगातेसमय विभिन्न कर नीति व सरकारी नीतियों का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
  3. वैकल्पिक कार्यर्विधियों को निर्धारण-किसी कार्य को सम्पन्न करने के अनेक तरीके होते है। अत: विभिन्नविकल्पों को तय कर नियोजन में शामिल करने हेतु विश्लेषण एवं चिन्तन करनाआवश्यक होता है।
  4. वैकल्पिक कार्यविधियों का मूल्यांकन-विभिन्न वैकल्पिक कार्यविधियों का चयन पश्चात् उनके गुण दोषों एवंलागत के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।
  5. श्रेष्ठ विकल्प का चयन-विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन एवं चिन्तन अत्यन्त सावधानी पूर्वक करकेश्रेष्ठ विकल्प का चयन किया जाता है इसे निर्णायक बिन्दु का नियोजन का निर्माणकहते हं।ै
  6. उपयोजनाओं का निर्माण- मूल योजना के कार्य को सरल बनाने के लिए सम्बन्धित उपयोजनाओं कानिर्माण किया जाता हैं जो लचीला होता है ताकि प्रतियोगियों के गतिविधियों कामुकाबला करने हेतु मोर्चाबन्दी किया जा सके।
  7. क्रियाओं का क्रम निश्चित करना-योजना एवं उपयोजनाओं का निर्माण हेा जाने के पश्चात क्रियाओं का क्रमनिश्चित किया जाता है ताकि कौन सा कार्य कब व कहॉं करना है स्पष्ट हो सके।
  8. क्रियान्वयन एवं अनुसरण-क्रियाओं का क्रम निर्धारण पश्चात् नियोजन को लागू या क्रियान्वित कीजाती है निर्देशों एवं नीतियों का अनुसरण किया जाता है वांछित उद्देश्यों की प्राप्तितक अनुसरण कार्य लगातार किया जाता है।




Comments अनिल mukati on 23-04-2019

गरीबी क्या है



आप यहाँ पर सहभागी gk, नियोजन question answers, general knowledge, सहभागी सामान्य ज्ञान, नियोजन questions in hindi, notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं।

Labels: , , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।

Comment As:

अपना जवाब या सवाल नीचे दिये गए बॉक्स में लिखें।

Register to Comment