मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व

Madhy Pradesh Ki Arthvyavastha Me Krishi Ka Mahatva

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Pradeep Chawla on 12-05-2019

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Print Version Last Updated On: 28/03/2018



मध्यप्रदेश में कृषि



क्षेत्रफल के मामले में मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बडा राज्य है। इसका भौगोलिक क्षेत्र 308 लाख हेक्टेयर है जो देश के कुल क्षेत्रफल का नौ फीसदी है। जनसंख्या के मामले में यह राज्य छठे स्थान (7.2 करोड की आबादी) पर है, इनमें से 72 फीसदी लोग गांवों में रहते हैं। यह राज्य मुख्य रूप से जंगल, खनिज पदार्थ, नदी और घाटी जैसी प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है। जंगलों के मामले में भी यह राज्य संपन्न है। इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र के 30.7 फीसदी हिस्से पर जंगल है। राज्य के 51 जिलों में 11 कृषि जलवायु क्षेत्र, पांच फसली क्षेत्र और अलग-अलग भूमि उपयोग, मृदा के प्रकार, बारिश और जल संसाधन बंटे हुए हैं। साथ ही राज्य में अनुसूचित जाति (21 फीसदी) और अनुसूचित जनजाति (15 फीसदी) की आबादी में अहम हिस्सेदारी है। यह दोनों मिलकर कुल आबादी के 36 फीसदी हैं। कुल आबादी के 31 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीते हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 22 फीसदी है। मध्यप्रदेश में साक्षरता दर 70.6 फीसदी है।





राज्य की अर्थव्यवस्था की प्रकृति कृषि आधारित होने की वजह से कृषि और संबंधित क्षेत्रों जैसे पशुपालन और मछली पालन की भूमिका काफी अहम है। ये राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख घटक हैं और दो कारणों से इनका महत्व काफी बढ जाता है। पहला, यह क्षेत्र राज्य के जीडीपी में करीबी एक तिहाई का योगदान देता है और राज्य के प्राथमिक सेक्टर में इसकी हिस्सेदारी 90 फीसदी है। दूसरा, प्रत्यक्ष गतिविधियों या अप्रत्यक्ष रूप से जुडाव के जरिए इस पर आबादी का एक बडा तबका निर्भर है और ग्राणीण आबादी का महत्वपूर्ण हिस्सा जीविका उपार्जन के आधारभूत स्रोतों के लिए इस पर आश्रित है। प्रत्यक्ष गतिविधियों में अपने खुद के उपभोग के लिए तमाम तरह के कृषि उत्पादों की पैदावार और फसलों व पशुधन उत्पादों को बेचकर आय कमाना और संबंधित क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करना शामिल है। अप्रत्यक्ष गतिविधियों में कृषि से जुडी सेवा की आपूर्ति उपलब्ध कराना शामिल है, जैसे- कृषि प्रसंस्करण के लिए कच्चा माल, कृषि कार्य से जुडी मशीनों और औजारों की मरम्मत और रख-रखाव, मार्केटिंग, भंडारण और गोदाम, बीज उत्पादन और भी कई चीजें शामिल हैं। इसके साथ ही कृषि और जुडे सेक्टर सडक निर्माण, बांध, छोटी सिंचाई परियोजना, कुटीर और लघु उद्योग के जरिए सहायक आधारभूत संरचना को जोड कर पूंजी निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं, जो राज्य के आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।





राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के आधे हिस्से पर खेती होती है। कुल बुवाई वाला क्षेत्र 154.22 लाख हेक्टेयर है। किसान 86.25 लाख हेक्टेयर पर साल में दो फसल लेते हैं। इस तरह वर्ष 2014-15 में कुल बुआई वाला क्षेत्र 240.47 लाख हेक्टेयर रहा, जो राज्य की कुल जमीन का 78 फीसदी है। राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य सहारा कृषि है और यही एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जो राज्य की ग्रामीण आबादी को बडी संख्या में रोजगार मुहैया कराने के साथ जीविका उपार्जन का विकल्प देता है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक मध्यप्रदेश में जीविकोपार्जन के लिए कुल कामकाजी लोगों के 69.8 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में कुल कामकाजी लोगों के 85.6 फीसदी कृषि पर आश्रित हैं। इसमें 31.2 फीसदी किसान और 38.6 फीसदी खेतीहर मजदूर हैं।



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