राजस्थानी नारी के आभूषण

Rajasthani Nari Ke Abhushan

Pradeep Chawla on 12-05-2019

सिर : राखडी (रखडी), बोर, बोरला, टीला, शीशफूल, सांकली, दामनी, सूरमा, मांग, मेबंद, टीका, टिकड़ा



गला / छाती : मान्द्लिया, खुन्गाली, पंचलड़ी, जंजीर, तुलसी, बजट्टी, हांसली, तिमनिया, पोत, हार, हंसहार, चन्द्रहार ( पांच – सात लड़ियों युक्त ), बजरबंटी, बलेवडा, हांकर, चंपकली, सरी, कंठी, कंठमाला, हालरो



कान : झेंला, टोटी, लौंग, छेलकड़ी, मुरकिया, कर्णफूल, पीपलपत्रा, फुलझुमका, अंगोट्या, बाली, झूमका, सुरलिया, लटकन



नाक : लूँग, काँटा, नथ, लटकन, वारी, चूनी, चोप, भंवरियो



अंगुली : अंगुठी, बीठी, मूंदडी, कुड़क, नथडी या भंवरकड़ी



कमर : कंदोरा, तगड़ी, करघनी, कणकती, सटका ( लहंगे के नेफे में अटका कर रखे जाना वाला आभूषण )



हाथ : चूड, चूड़ी, नोगरी, आंवला, हथफूल, कड़ा, कंगन, चांट, गजरा



बाजू : बाजू, बाजूबंद, भुजबंध, अणत, तकया, टड्डा



पाँव : पेंजनी, कड़ा, टणका, आंवला, जीवी, तोडा, छड, गोल्या, लंगर, लछन, हिरनामैन, पायल, पायजेब, नुपूर, घुंघरू, झांझर, नेवरी, रमझोल, फोलरी, बीछुडी, चट्टी



Comments Prem on 09-12-2020

Champakali Abhushan kahan pahna jata hai

Pooja sen on 14-04-2020

Rajasthan ke aabhushn

Samundar lal on 07-03-2020

पगड़ी कहां पर नहीं जाती है

Komal sangla on 06-12-2019

Goliya. Oowala. Noghri kha pehna jata h...



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