चोल कला

Chol Kala

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 25-11-2018

चोल मंदिर वास्तुकला का चरमोत्कर्ष तंजौर के वृहदेश्वर मंदिर और गंगई कोण चोल पुरम मंदिर के रूप मे दिखाई पड़ता है,दोनों ही मंदिर एक विशाल प्रांगण मे बनाये गए है।शिखरों को ऊंचा रखा गया है,जो उनकी साम्रज्य की विशालता को प्रदर्शित करता है।गर्भ गृह ,विमान गुम्बदाकार स्तूपिका पहले की भांति है,किंतु मंदिर के मुख्य शिखर पर बहुत से छोटे छोटे छतरीनुमा शिखरों का निर्माण किया गया है।जैसा की इसके पहले कांची के कैलाश नाथ मंदिर मे भी किया गया था।चोलो ने सभामंडप एक लंबे गलियारे की भांति बनवाया है।मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट पत्थरो की सहायता से हुआ है।
मंदिर के बहिर्वर्ती भाग मे प्रवेश द्वार को भव्यता प्रदान की गयी है।यहां नटराज के रूप मे शिव की मूर्तियां बनाई गई है।मंदिर के प्रांगण के अंदर नंदी की विशालतम मूर्ति है।किनारे की ओर गोलाकार आकृति वाले गुम्बदाकार मंदिर भी बनाये गए है।मंदिर के अंदर दीवारों पर चित्र बनाये गए है,जिसमे राज्याभिषेक ,बाजार ,हंस आदि के चित्र है।मंदिर के अंदर मुख्य देवता के मूर्ति के इर्द गिर्द गौण महत्व के देवताओं की मूर्तियां भी है,जो सामंतवाद एवं उसके प्रभाव को दर्शाता है।जहाँ सामंत राजा से अपनी शक्ति प्राप्त करते थे,इसीलिए चोल नरेशो ने मंदिर मे अपनी स्वयं की मूर्तियां लगवाई है।वृहदेश्वर के मंदिर मे परांतक प्रथम एवं राजराज की मूर्तियां लगी है।चोलो के उत्तराधिकारी मंदिर निर्माण की परंपरा को जारी रखा।
कुलोतुंग द्वीतिय के शासन काल मे ऐरावतेश्वर मंदिर,कंपदेश्वर मंदिर का निर्माण किया गया।इन मंदिरों में चोल वास्तुकला की सभी विशेषताएं प्रदर्शित होती है।



Comments CHANDRABHAN Chauhan on 12-05-2019

chol kal ke sansthapak



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