गंगनहर का इतिहास

Gangnahar Ka Itihas

Gk Exams at  2020-10-15

GkExams on 28-02-2019

गंगा नहर, एक नहर प्रणाली है जिसका प्रयोग गंगा नदी और यमुना नदी के बीच के दोआब क्षेत्र की सिंचाई के लिए किया जाता है।


यह नहर मुख्य रूप से एक सिंचाई नहर है, हालांकि इसके कुछ हिस्सों को नौवहन के लिए भी इस्तेमाल किया गया था, मुख्यतः इसकी निर्माण सामग्री के परिवहन हेतु। इस नहर प्रणाली में नौकाओं के लिए जल यातायात सुगम बनाने के लिए अलग से जलपाश युक्त नौवहन वाहिकाओं का निर्माण किया गया था। नहर का प्रारंभिक निर्माण 1842 से 1854 के मध्य, 6000 फीट³/ सेकण्ड के निस्सरण के लिए किया गया था। उत्तरी गंगा नहर को तब से समय के साथ आज के निस्सरण 10500 फुट³/सेकण्ड (295 मी³/सेकण्ड) के अनुसार धीरे धीरे बढ़ाया गया है। नहर प्रणाली में 272 मील लम्बी मुख्य नहर और 4000 मील लंबी वितरण वाहिकायें समाहित हैं।


इस नहर प्रणाली से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के दस जिलों की लगभग 9000 किमी² उपजाऊ कृषि भूमि सींची जाती है। आज यह नहर प्रणाली इन राज्यों में कृषि समृद्धि का मुख्य स्रोत है और दोनो राज्यों के सिंचाई विभागों द्वारा इसका अनुरक्षण बड़े मनोयोग से किया जाता है।



इतिहास



1837-38 में पड़े भीषण अकाल, के बाद चले राहत कार्यों में खर्च हुए लगभग दस मिलियन (एक करोड़) रुपये और इस कारण से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को हुई राजस्व हानि के बाद, एक सुचारू सिंचाई प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गयी।

गंगा नहर को अस्तित्व में लाने का श्रेय कर्नल प्रोबी कॉटली को जाता है, जिन्हें पूरा विश्वास था कि एक 500 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जा सकता है। उनकी इस परियोजना के विरोध में बहुत सी बाधायें और आपत्तियां आयीं जिनमें से ज्यादातर वित्तीय थीं, लेकिन कॉटली ने लगातार छह महीने तक किये गये पूरे इलाके का दौरे और सर्वेक्षण के बाद अंतत: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को इस परियोजना को प्रायोजित करने के लिए राजी कर लिया।

नहर की खुदाई का काम अप्रैल 1842 में शुरू हुआ। कॉटली ने नहर के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली ईंटों के लिए भट्ठों की स्थापना की। प्रारंभ में कॉटली को हरिद्वार के हिंदू पुजारियों के विरोध का सामना करना पड़ा, जो यह सोचते थे कि पवित्र गंगा नदी के पानी को कैद करना सही नहीं होगा, कॉटली ने उन्हें यह कहकर शांत किया कि वो बनने वाले बाँध में एक अंतराल छोड़ देंगे जहां से गंगा का पानी निर्बाध रूप से प्रवाहित हो सकेगा। इसके अलावा कॉटली ने पुजारियों को खुश करने के लिए नदी किनारे स्थित स्नान घाटों की मरम्मत कराने का वादा भी किया। कॉटली ने नहर निर्माण कार्य का उद्घाटन भी भगवान गणेश की वंदना से किया।



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