जल प्रबंधन pdf

Jal Prabandhan pdf

GkExams on 12-05-2019

जल प्रबंधन -

धरती पर गिरने वाले वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को रोका जा सकता है। बशर्ते इसके लिए संरचनाओं की ऐसी श्रृंखला तैयार कर दी जायें कि पानी की एक भी बूँद 10 मीटर से अधिक दूरी पर न बहने पायें। इसे कोई जल संरचना रोक ले और धरती में अवशोषित कर ले यही संपूर्ण जल प्रबंधन है। जलग्रहण का सिद्धांत है कि ‘पानी दौड़े नहीं, चले’ है, जबकि संपूर्ण जल प्रबंधन का सिद्धान्त है कि ‘पानी न दौड़े न चले, बल्कि रेंगे और अंततः रुक जाये, और जमीन की गहराईयों में ऐसा समा जाये कि उसे सूरज की रोशनी भी उड़ा के न ले जाये।‘ वह जमीन के अंदर धीरे-धीरे चलता हुआ वहां निकले जहां हम चाहते हैं (कुओं में, तालाबों में, हेंडपंपों में, ट्यूबवेल में, नदी-नालों में)। इस प्रकार से प्राप्त जल स्वच्छ एंव सुरक्षित होता है और लंबे समय तक मिलता/बहता रहता है।



इन संरचनाओं में 5 से 10 सें. मी. वर्षा जल एक बार में रोका जा सकता है। इससे अधिक वर्षा यदा-कदा ही दो-तीन वर्षों में एक बार होती है, और इतनी साल में तीन-चार बार। इस प्रकार संपूर्ण वर्षा में 100 सें. मी. तक की योग वर्षा को भूमि में अवशोषित किया जा सकता है। यह जल भूमि में अवशोषित होकर धीमी गति से कुंए, ट्यूबवेल, हेंडपंप व तालाबों में आगामी 6 माह से 12 माह तक प्राप्त होता रहता है। इससे हमारी खरीफ की फसल सुनिश्चित होती है, सुखे से मुक्ति मिलती है, रबी की फसल भी पर्याप्त होती है गर्मी में पेयजल संकट नहीं होता है।



धरती पर गिरने वाले वर्षा जल की प्रत्येक बूँद को रोकने, पानी की एक भी बूँद 10 मीटर से अधिक दूरी पर न बहने पाये। इसे कोई जल संरचना रोक ले और धरती में अवशोषित कर लें। यही संपूर्ण जल प्रबंधन है।



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