World Sanskrit Day : प्रतिवर्ष हिन्दू कैलेंडर के अनुसार सावन महीने की पूर्णिमा को दुनियाभर में संस्कृत भाषा महत्व समझाने के उद्देश्य से विश्व संस्कृत दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष इस दिवस (Sanskrit Day 2025) को अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 09 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य संस्कृत भाषा को लुप्त होने से बचाना है और युवाओं को इसके प्रति लगाव लाना है ताकि लोग संस्कृत भाषा को आसानी से बोल सके।
हर वर्ष संस्कृत दिवस को एक थीम के साथ मनाया जाता है उसी कड़ी में world sanskrit day theme 2025 - "Sanskrit & Computational Linguistics" रखी गयी है। इस लेख के जरियें हम आपको संस्कृत भाषा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बातों से अवगत कराने वाले है। जो आपके लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं में उपयोगी साबित हो सकती है...
दोस्तों संस्कृत सबसे पुरानी इंडो-यूरोपीय भाषाओं में से एक है। संस्कृत भाषा में करीब 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्दों की विश्व में सबसे बड़ी शब्दावली है। हिंदू धर्मग्रंथों में संस्कृत के मंत्रों को उपयोग हजारों वर्षों से किया जा रहा है। संस्कृत को "देववाणी" और प्राचीनतम भारतीय भाषा माना जाता है।
संस्कृत भाषा भारत समेत विश्व की प्राचीनतम और शास्त्रीय भाषा है, जिसमें वेद, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, गीता जैसे महान धार्मिक एवं सांस्कृतिक ग्रंथ रचे गए हैं। आपको बता दे की ये सभी ग्रंथ मानव जीवन के उच्चतम मूल्य और मोक्ष प्राप्ति के मार्गदर्शक हैं।
इसके अलावा संस्कृत साहित्य में गणित, ज्योतिष, आयुर्वेद, राजनीति, नैतिकता, नाटक, कविता आदि सभी प्रकार का ज्ञान समाहित है, जो इसे ज्ञान का अमूल्य भण्डार बनाता है। शायद इसलिए संस्कृत भाषा को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिकता की आत्मा कहा जा सकता है।
दोस्तों कई लोग जानने के इच्छुक रहते है की संस्कृत की खोज किसने की थी तो उन्हें बता दे की - संस्कृत भाषा की खोज या रचना किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं की गई थी, बल्कि यह एक प्राचीन भाषा है जिसका विकास कई सदियों में हुआ था। संस्कृत का सबसे पुराना ग्रंथ ऋग्वेद है, जिसकी रचना कम से कम लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुई मानी जाती है।
ध्यान रहे की संस्कृत भाषा को व्याकरणिक और वैज्ञानिक रूप देने का सबसे महत्वपूर्ण योगदान महर्षि पाणिनि का है। उन्होंने लगभग 550 ईसा पूर्व अपने प्रसिद्ध ग्रंथ "अष्टाध्यायी" में संस्कृत भाषा के व्याकरण के नियम स्थापित किए, जिससे संस्कृत भाषा का सटीक और व्यवस्थित स्वरूप सामने आया। इसलिए उन्हें अक्सर संस्कृत भाषा का जनक या पिता कहा जाता है।
दोस्तों यहाँ हम आपको संस्कृत में छोटी सी कहानी बता रहे है, जो की सच्ची मित्रता पर आधारित है। इस कहानी में खरगोश और शेर की मित्रता पर प्रकाश डाला गया है...
एकदा कश्चित् सिंहः वने भ्रमन् आसीत्। तेन मार्गे कश्चिद् शशकः लघुशस्त्रेण सर्पेण त्रस्तः वेदितुम् न शक्नोत्। सिंहः तं दृष्ट्वा द्रुतं समुपगतवान्। सः शशकस्य हेल्प् कृतवान्।
शशकः विनयपूर्वकं किंचित् धनं दत्तवान्।
सिंहः कृतज्ञः भूत्वा अगच्छत्।
ततः समयतः सिंहः पुनः सर्पेण बाधितः। सः तत् देख्य शशकं स्मृत्वा शीघ्रमपि अगच्छत्।
एवं मित्रता सत्यं भवति, संकटेषु परस्परं सहायः।
Labels: All gk , Jobs In World