Happy Janmashtami : जानिए जन्माष्टमी कब है (janmashtami kab hai) एवं व्रत में क्या खाएं ?


By Rajesh Kumar at  2025-07-22  at 12:54:09
Happy Janmashtami : जानिए जन्माष्टमी कब है (janmashtami kab hai) एवं व्रत में क्या खाएं ?
Happy Janmashtami : जानिए जन्माष्टमी कब है (janmashtami kab hai) एवं व्रत में क्या खाएं ?





सबसे पहले हमारे सभी प्रिय पाठकों को "जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं (happy janmashtami)"। दोस्तों जन्माष्टमी केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, उल्लास और गहन दार्शनिक शिक्षाओं का अनूठा संगम है। यह वह दिवस है जब भक्त अपने प्रिय "कान्हा", "गोपाल", "मुरलीधर" के जन्मोत्सव को सिर आँखों पर बिठाते हैं। बाल गोपाल की मधुर मुस्कान और लीलाएँ हमारे हृदय में प्रेम और भक्ति का संचार करती हैं।

जन्माष्टमी का संदेश है – अंधकार को प्रकाश से, घृणा को प्रेम से, निराशा को आशा से और बुराई को अच्छाई से परास्त करना। यह पावन पर्व हमारे जीवन में नवीन ऊर्जा, आनंद और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भर देता है।

जन्माष्टमी कब है (Janmashtami Kab Hai) ?



दोस्तों जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्री कृष्ण के धरती पर अवतरण का दिवस है, जिसे हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। बहुत से लोग जानना चाहते है की जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी ( janmashtami kab ki hai ) इसलिए उन्हें बता दे की वर्ष 2025 में अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त को मनाया जाएगा।

ध्यान रहे की इस बार यानी वर्ष 2025 में श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन कई प्रकार की रस्मे होती है जैसे - मटकी फोड़ना, महिलाओं का व्रत रखना और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन धूमधाम से मनाकर खुशियाँ बांटना (janmashtami wishes) इत्यादि।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी कथा -



जैसा की दोस्तों हम सब जानते है की श्री कृष्ण देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र थे। मथुरा नगरी का राजा कंस था, जो कि बहुत अत्याचारी था। उसके अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे। एक समय आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका वध करेगा।

यह सुनकर कंस ने अपनी बहन देवकी को उसके पति वासुदेवसहित काल-कोठारी में डाल दिया। कंस ने देवकी के कृष्ण से पहले के 7 बच्चों को मार डाला। और जब देवकी ने श्री कृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्री कृष्ण को गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के पास पहुंचा आएं, जहां वह अपने मामा कंस से सुरक्षित रह सकेगा।

जेल की दरवाजे अपने आप बंद हो गई। उनके हाथों में फिर से हथकड़ी लग गई। सारे पहरेदार भी उठ गए और कन्या के रोने की आवाजें आने लगी। सूचना मिलते ही कंस ने कारागार से कन्या को लाया और उसे मारने की कोशिश की लेकिन वह आकाश में उड़ गई और बोली - अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा?

तुझे मारने वाला अब पैदा हो चुका है। इसके बाद कंस ने कृष्ण का पता लगाकर उसे मारने का खूब प्रयास किया। कई दैत्य-राक्षस भेजे। लेकिन कृष्ण को कोई मार ना सका। अंततः श्री कृष्ण ने कंस का वध किया।

जन्माष्टमी के व्रत में क्या खाएं ?



दोस्तों अगर आप जन्माष्टमी का व्रत कर रहे है तो आपको सबसे पहले तो यह ध्यान रखना है की इस दिन आपको बहुत ज्यादा कोई भी फिजिकल एक्टिविटी नही करनी है। यह करने से आपको बचना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से आपको जल्दी भूख लग जाती है।

जन्माष्टमी के व्रत में आप अपने शरीर को हाइड्रेट रखने और कमजोरी को दूर करने के लिए ताजे फल, मखाने, दूध और दही का सेवन कर सकते है। चूँकि यह व्रत काफी लम्बे समय का होता है इसलिए अपने आप को एनर्जी देते रहे।

इसके अलावा हम बात करें की जन्माष्टमी के व्रत में आपको क्या कुछ नही खाना चाहिए तो इस दिन आपको चाय - कॉफी, प्याज और लहसुन जैसी चीजों का सेवन नही करना चाहिए। क्योंकि इनकी वजह से आपको आगे चलकर अपच जैसी समस्याओं का सामना नही करना पड़े।

हम समझ सकते है की अधिकांश भक्त इस दिन व्रत रखते हैं। इस दिन केवल फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। व्रत का समापन अगले दिन नवमी को होता है।

निष्कर्ष -



दोस्तों कृष्ण का व्यक्तित्व प्रेम, आनंद और जीवन के प्रति उत्साह से भरपूर है। जन्माष्टमी हमें जीवन को उत्साह और प्रसन्नता से जीने की सीख देता है। यह त्योहार सभी जाति, वर्ग और आयु के लोगों को एक साथ लाता है, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। इसलिए हमारे सभी पाठकों को - "हरे कृष्णा, हरे राम" !





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