हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जारी Global Unicorn Index 2025 के मुताबिक दुनियाभर के 67 देशों में भारत को शीर्ष तीसरे स्थान पर रखा गया है। इस इंडेक्स के अनुसार 1,453 यूनिकॉर्न की सूची में भारतीय कंपनियों की संख्या में कुल गिरावट शेयर इंडेक्स पर अच्छे लाभ के बावजूद स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश की कमी को दर्शाता है।
इसके अलावा देश के बाहर कंपनी शुरू करने की प्रवृत्ति ने भी भारत के लिए संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। भारत के फर्म संस्थापकों ने देश के बाहर 109 यूनिकॉर्न शुरू किए, जबकि देश के भीतर उनकी संख्या 64 (how many unicorn company in india) थी। हालाँकि भारत की तीसरी रैंक वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
भारत 64 यूनिकॉर्न के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के प्रमुख शहरों की बात करें तो - बेंगलुरु, मुंबई, और गुरुग्राम शामिल है। यहाँ हम उन 10 देशों की सूची बता रहे है जिनमें वर्ष 2025 में सबसे अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स हैं...
1. संयुक्त राज्य अमेरिका (758)
2. चीन (343)
3. भारत (64)
4. यूनाइटेड किंगडम (61)
5. जर्मनी (36)
6. फ्रांस (30)
7. कनाडा (28)
8. इज़राइल (20)
9. दक्षिण कोरिया (18)
10. सिंगापुर (18)
इसे सरल शब्दों में समझें तो - जिस कम्पनी का वैल्यूएशन $1 बिलियन (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) या उससे अधिक हो उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है। यह शब्द पहली बार वर्ष 2013 में वेंचर कैपिटलिस्ट एलीन ली द्वारा गढ़ा गया था, क्योंकि ऐसी सफल कंपनियाँ बहुत ही सक्सेसफुल होती है।
हालाँकि यूनिकॉर्न स्टेटस एक माइलस्टोन है, लेकिन अंतिम लक्ष्य नहीं। यूनिकॉर्न के आगे डेकाकॉर्न ($10B+) और हेक्टोकॉर्न ($100B+) बनने की चुनौती होती है। इसलिए जो भी यूनिकॉर्न होते है वो लगातार अपनी वैल्यूएशन बढ़ाने पर फोकस रखते है।
भारत में कई यूनिकॉर्न कंपनियां हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। जिनमे - फ्लिपकार्ट, ओला, बायजूस, जोमैटो, पेटीएम, रेजरपे, स्विगी, ड्रीम11 और फोनपे आदि शामिल हैं। ये कंपनियां न केवल अपने-अपने उद्योगों में बदलाव ला रही हैं, बल्कि नए बाजार भी बना रही हैं और भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
भारतीय यूनिकॉर्न्स ने वैश्विक नक्शे पर भारत को "इनोवेशन हब" के रूप में स्थापित किया है। इन कंपनियों ने नौकरियाँ सृजित की हैं, पारंपरिक उद्योगों को बदला है, और डिजिटल इंडिया की कहानी को गति दी है। यहाँ हम निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा भारतीय यूनिकॉर्न कम्पनियों के नाम और उनके क्षेत्र के बारें में बता रहे है जिसमे इन कम्पनियों ने काफी हद तक सफलता हासिल की है...
• फ्लिपकार्ट: ई-कॉमर्स
• ओला: राइड-शेयरिंग और टैक्सी सेवा
• बायजूस: एडटेक (शिक्षा प्रौद्योगिकी)
• जोमैटो: ऑनलाइन फूड डिलीवरी
• पेटीएम: डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाएं
• रेजरपे: भुगतान गेटवे और वित्तीय सेवाएं
• स्विगी: ऑनलाइन फूड डिलीवरी
• ड्रीम11: फैंटेसी स्पोर्ट्स
• फोनपे: डिजिटल भुगतान
• ज़ेप्टो: ऑनलाइन ग्रोसरी डिलीवरी
• एथर एनर्जी: इलेक्ट्रिक वाहन
• ग्रो: ऑनलाइन निवेश मंच
• नायका: सौंदर्य और फैशन ई-कॉमर्स
• क्रुट्रिम: वित्तीय प्रौद्योगिकी
• मनीव्यू: वित्तीय प्रौद्योगिकी
• परफियोस: सॉफ्टवेयर
• रैपिडो: राइड-हेलिंग
• रेटगेन: मार्केटिंग और एनालिटिक्स
• ओपन फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज: नियोबैंकिंग
• जेपाय: भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर
इन्मोबी (InMobi) भारत का पहला यूनिकॉर्न (Unicorn) स्टार्टअप है। यह एक मोबाइल विज्ञापन कंपनी है, जिसने 2011 में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का मूल्यांकन हासिल किया था। आपको जानकारी रहे की इनमोबी की स्थापना 2007 में नवीन तिवारी, मोहित सक्सेना, अमित गुप्ता और अभय सिंघल ने की थी।
ऐसा नही है की यूनिकॉर्न केवल सफलता ही हासिल करते है उनके सामने भी कई सारी समस्याएँ आती रहती है जिसके कारण उन्हें विफलता का सामना करना पड़ता है। और जो विफलता के मुख्य कारण है वो इस प्रकार है...
प्रतिस्पर्धा: हर क्षेत्र में सैकड़ों क्लोन स्टार्टअप्स।
फंडिंग क्रंच: प्रॉफिट न होने पर निवेशकों का भरोसा खोना।
रेवेन्यू मॉडल फेल: यूजर्स हैं, पर कमाई नहीं (जैसे— कई डिलिवरी ऐप्स)।
रेगुलेशन: सरकारी नियम (डेटा प्राइवेसी, टैक्स) से संघर्ष।
एग्जिट स्ट्रेटजी: IPO या अधिग्रहण तक पहुँचने में विफलता।
आजतक के इतिहास में भारतीय यूनिकॉर्न - बायजू (fastest unicorn in india), हाइक, फार्मेसी, माईग्लैम और रिविगो अब तक विफल साबित हुए है। इसके अपने कई कारण हो सकते है। लेकिन यह बात भी सच है की इनके सामने बहुत सारी चुनौतियाँ आती रहती है जिसके कारण इन कम्पनियों का वैल्यूएशन लगातार गिरता जाता है।