मंडोर दुर्ग राजस्थान (Mandore Fort)Rajasthan


REKHA CHAUDHARY at  2018-08-27  at 00:00:00
मंडोर दुर्ग राजस्थान (Mandore Fort)Rajasthan

Mandor Jodhpur की स्थापना से पूर्व MARWAD की राजधानी थी। Mandor का नाम प्राचीन काल में मांडव्यपुर था, जो माण्डव्य ॠषि के नाम पर पड़ा था। Ghatiyala से प्राप्त शिलालेख से ज्ञात होता है कि Mandore Durg का निर्माण 7वीं शताब्दी के पूर्व हो चुका था। शिलालेखों के अनुसार ब्राह्मण हरिचन्द्र के पुत्रों ने Mandore पर अधिकार कर लिया तथा 623 ई0 में उन्होंने इसके चारों ओर दीवार बनवाई।

Mandore Durg के अवशेष आज भी विद्यमान हैं। यह Durg एक पहाड़ी के शिखर पर स्थित था, जिसकी ऊँचाई 300 से 350 फुट थी। यह Durg आज खंड़हर हो चुका है। कुछ खण्डहरों के नीचे पड़ा है तथा कुछ विघटित अवस्था में है। विघटित अवस्था में विद्यमान Durg को देखकर यद्यपि उसकी वास्तविक निर्माण विधि का पूरा आकलन नही किया जा सकता तथापि इस विषय में कुछ अनुमान अवश्य लगाया जा सकता है। पहाड़ी पर स्थित इस Durg के चारों ओर पाषाण निर्मित दीवार थी। Durg में प्रवेश करने के लिए एक मुख्य मार्ग था। Durg की पोल पर लकड़ी से निर्मित विशाल दरवाजा था। Durg के शासकों के निवास के लिए महल, भण्डार, सामंतो व अधिकारियों के भवन आदि बने हुए थे। जिस मार्ग द्वारा नीचे से पहाड़ी के ऊपर किले तक पहुँचा जाता था वह उबड़-खाबड़ था। किले की प्राचीर में जगह-जगह चौकोर छिद्र बने हुए थे।

Mandor को Durg सामरिक सुरक्षा की दृष्टि से तात्कालीन समय में काफी सुदृढ़ एवं महत्वपूर्ण समझा जाता था। इसके कारण शत्रु की सेना को पहाड़ी पर अचानक चढ़ाई करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था। Durg में प्रवेश-द्वार इस तरह से निर्मित किए गए थे कि उन्हें तोड़ना शत्रु के लिए असंभव सा था। किले में पानी की प्रयाप्त व्यवस्था होती थी जिससे आक्रमण के समय सैनिकों एवं रक्षकों को जल की कमी का सामना नही करना पड़े।

इस Durg की प्राचीर चौड़ी एवं सुदृढ़ थी। Durg के पास ही एक विशाल जलाशय का निर्माण करवाया गया था। इस जलाशय की सीढियों पर नाहरदेव नाम अंकित है जो Mandor का अंतिम Parmar शासक था। Durg की दीवारें पहाड़ी के शीर्ष भाग से ऊपर उठी हुई थीं। बीच के समुन्नत भाग पर विशाल महल बने थे जो नीचे के मैदानों पर छाये हुए थे। Mandor Durg के बुर्ज गोलाकार न होकर अधिकांशत: चौकोर थे, जैसे कि अन्य प्राचीन दुर्गों में Mandor Durg 783 ई0 तक Parihar शासकों के अधिकार में रहा। इसके बाद नाड़ोल के Chauhan शासक रामपाल ने Mandor Durg पर अधिकार कर लिया था। 1227 ई0 में गुलाम वंश के शासक इल्तुतनिश ने Mandor पर अधिकार कर लिया। यद्यपि Parihar शासकों ने Turkey आक्रांताओं का डट कर सामना किया पर अंतत: Mandor तुर्कों के हाथ चला गया। लेकिन Turkey आक्रमणकारी Mandor को लम्बे समय तक अपने अधिकार में नही रख सके एंव Durg पर पुन: प्रतिहारों का अधिकार हो गया। 1294 ई0 में फिरोज खिलजी ने परिहारों को पराजित कर Mandor Durg अधिकृत कर लिया, परंतु 1395 ई0 में परिहारों की इंदा शाखा ने Durg पर पुन: अधिकार कर लिया। इन्दों ने इस Durg को चूंडा Rathore को सौंप दिया जो एक महत्वाकांक्षी शासक था। उसने आस-पास के कई प्रदेशों को अपने अधिकार में कर लिया। 1396 ई0 में गुजरात के फौजदार जफर खाँ ने Mandor पर आक्रमण किया। एक वर्ष के निरंतर घेरे के उपरांत भी जफर खाँ को मंडोर पर अधिकार करने में सफलता नही मिली और उसे विवश होकर घेरा उठाना पड़ा। 1453 ई0 में राव जोधा ने Mandore Durg पर आक्रमण किया। उसने मरवाड़ की राजधानी Mandore से स्थानान्तरित करके Jodhpur ले जाने का निर्णय लिया। राजधानी हटने के कारण Mandor Durg धीरे-धीरे वीरान होकर खंडहर में तब्दील हो गया।


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