विमुद्रीकरण और उसके प्रभाव Demonetization and Its Effects


Rajesh Kumar at  2018-08-27  at 05:41:00
विमुद्रीकरण और उसके प्रभाव Demonetization and Its Effects

भ्रष्टाचार और काले धन से निपटने के लिये विमुद्रीकरण

जयंत राय चौधरी

एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में , प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर , 2016 की मध्यरात्रि से 500 रु. और 1000 रु. की मौजूदा श्रृंखला के नोटों के विमुद्रीकरण की घोषणा कर दी । इस कदम से बड़ी मात्रा में जमा काला धन समाप्त हो जाने की आशा है । प्रधानमंत्री ने अचानक राष्ट्र के नाम अपने टेलीविजन संबोधन में कहा , ‘ ‘ भ्रष्टाचार और काले धन पर अंकुश लगाने के लिये हमने यह फै़सला किया है कि वर्तमान में उपयोग में लाये जा रहे 500 और 1000 रुपये के करंसी नोट मध्यरात्रि अर्थात् 8 नवंबर , 2016 से कानूनी तौर वैध मुद्रा नहीं रहेंगे । ‘ ‘ इसका अर्थ है कि ये नोट मध्यरात्रि के बाद से लेनदेन के लिये स्वीकार्य नहीं होंगे । ’ ’ सभी बैंकों और एटीएम के एक दिन बंद रहने के उपरांत , भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 500 और 2 , 000 रुपये मूल्य के नये नोट बृहस्पतिवार , 10 नवंबर , 2016 से जारी किये जा रहे हैं ।

यह फैसला क्यों लिया गया ?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने , जब वे ढाई वर्ष पहले सत्ता में आये थे , कालेधन की समस्या से निपटने का वायदा किया था और भारत में समानांतर अर्थव्यवस्था को समाप्त करने की प्रतिज्ञा की थी , जिसका असाधारण रूप से सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में कमी में योगदान रहा है । जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था में 2011 और 2016 के दौरान 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है , अर्थव्यवस्था में धन की गणना 40 प्रतिशत बढ़ी है । लेकिन रु. 500 के नोटों के परिचालन में 76 प्रतिशत की और रु. 1000 के नोटों में चौंकाने वाली 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है , जिसका अर्थ है कि उच्च मूल्य के नोटों की मांग तीव्रता से बढ़ी है , जिसके कारण यह संदेह पैदा हुआ कि इसमें से अधिकतर काले धन के तौर पर जमा की जा रही है ।

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा , ‘ ‘ हमारे देश की वित्तीय सत्यनिष्ठा बनाये रखने के लिये यह उपाय आवश्यक था । ’ ’ विमुद्रीकरण के बारे में कई तरफ से सुझाव दिये गये थे ।

इस कदम से जाली नोटों के प्रवाह पर भी अंकुश लगेगा जो कि एक अभिशाप के तौर पर वर्षों से भारतीय वित्तीय बाज़ारों को अपना शिकार बना रहा है । भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा कि यद्यपि भारतीय करंसी की सुरक्षा विशेषताओं का उल्लंघन नहीं हुआ है , पाकिस्तान की खुफिय़ा एजेंसी द्वारा धकेले जा रहे जाली नोट कानूनी मुद्रा की तरह के थे और बाज़ार में असमंजस उत्पन्न कर रहे थे । वर्तमान में कानूनी रूप से वैध 500 रु. के 16.5 अरब नोट हैं और रु. 1000 के 6.7 अरब नोट हैं । परंतु अनुमान लगाया गया है कि बाज़ार में उच्च मूल्य के बड़ी संख्या में नोट परिचालन में हैं जिससे ये स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत में बड़े पैमाने पर जाली करंसी नोट भेजे जा रहे हैं ।

रु. 500 और रु. 1000 के करंसी नोटों के विमुद्रीकरण का सरकार का फैसला भारत को नकदी रहित अर्थव्यवस्था की दिशा में भी अग्रसर करेगा । वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने ज़ोर देकर कहा कि यह एक फैसला लोगों के अपने धन को ख़र्च करने और रखरखाव के मार्ग को बदल देगा । भारत देश की नकदी पर निर्भर अर्थव्यवस्था को कागज रहित  लेनदेन की तरफ ले जाने का प्रयास कर रहा है । इसने रियायतों और प्रोत्साहनों का एक मसौदा पेपर प्रकाशित किया है जिस पर ऑनलाइन और प्लास्टिक भुगतानों का विकल्प चुनने वालों के लिये विचार किया जा सकता है । लेकिन यह कदम अभी अपरिपक्वता की स्थिति में है ।

परिचालन में 1 , 64 , 000 करोड़ रु. की करंसी का 86 प्रतिशत हिस्सा उच्च मूल्य के बैंक नोटों का है । मुद्रास्फीति के कारण मूल्यों में वृद्धि से लोग उच्चतर मूल्यों के नोटों को वरीयता देते हैं । परंतु अब उच्च मूल्य के नोटों को हतोत्साहित करने के कदम उठाये जाने से सरकार अधिक से अधिक लोगों को ई - कॉमर्स और प्लास्टिक मनी का विकल्प चुनने को कह सकती है । विश्लेषकों का विश्वास है कि उच्च मूल्य के नोटों को समाप्त किये जाने के कदम से लोगों को अब लेनदेन के लिये अपने खातों और वित्तीय प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिये मज़बूर होना पड़ेगा । एक अनुमान के अनुसार भारत में मोबाइल कॉमर्स मार्केट वर्तमान 2 अरब अमरीकी डॉलर से बढक़र 2019 तक 19 अरब अमरीकी डॉलर हो जायेगी ।

अधिकारियों का कहना है कि मैकिन्से के अध्ययनों में कहा गया है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं द्वारा डिजिटल वित्त को बड़े पैमाने पर अपनाये जाने से उनके सकल घरेलू उत्पाद में 6 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है । अध्ययन में कहा गया है , ‘ ‘ भारत में 2025 तक 700 अरब अमरीकी डॉलर की वृद्धि के साथ यह वृद्धि 11 । 8 प्रतिशत हो सकती है । ’ ’ यह अतिरिक्त जीडीपी 21 मिलियन तक सृजन कर सकता है । ’ ’ इसके पीछे का विचार समाज को इलेक्ट्रॉनिक लेनदेनों की तरफ मोड़ने और नकदी से दूर रखना है , क्योंकि इससे हमें धन के प्रवाह की निगरानी करने और काले धन पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी ।

आम आदमी के लिये क्या कदम उठाये गये ?

10 नवंबर से 500 रु. और 1000 रु. के पुराने नोट डाकघरों और बैंकों में बदले जा रहे हैं । किसी भी वैध पहचान - पत्र जैसे कि पासपोर्ट , राशन कार्ड , पैन कार्ड या आधार कार्ड के साथ यह प्रक्रिया 30 दिसंबर तक जारी रहेगी । जो व्यक्ति 30 दिसंबर तक अपने नोटों को नहीं बदलवा पायेंगे उन्हें 31 मार्च तक भारतीय रिज़र्व बैंक में इन्हें जमा कराने की अनुमति होगी । हालांकि एक दिन में बदली जाने वाली धनराशि की एक सीमा होगी । लेकिन बैंक खाते में जमा कराने पर धनराशि की कोई सीमा नहीं होगी । पर्यटक और विदेश से लौटने वाले भारतीय हवाई अड्डों पर अपने रु. 5000 मूल्य तक के नोटों को बदलवा सकते हैं ।

एक तरफ महात्मा गांधी और लाल किला के चित्र वाले 500 रु. के नोटों की नई श्रृंखला जारी की जा रही है और मंगलयान अंतरिक्ष रॉकेट वाले 2000 रु. के नोटों की नई श्रृंखला 10 नवंबर से शुरू की जायेगी । नोटों की नई श्रृंखला ब्रेल अनुरूप होगी और दृष्टिहीन इन नोटों को छूकर पहचान कर सकेंगे । इन नोटों की करंसी का मुद्रण गोपनीय तरीके से किया गया और इन्हें आरबीआई करंसी चेस्टों में पहुंचाया गया है । इन नोटों को बदलवाने के इच्छुक सभी लोगों को वैध पहचान - पत्र प्रस्तुत करना होगा और विनिमय को दर्ज किया जायेगा ।

माना जाता है कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने उस स्रोत से करंसी नोट हासिल कर लिये थे जहां से भारत करंसी नोट खरीदता है और वह उच्च गुणवत्ता के जाली भारतीय नोट छाप रही थी , जिसे वह विभिन्न सीमाओं से भारत में भेज रही थी । अधिकारियों ने कहा कि जबकि 8 नवंबर की आधी रात से 500 रु. और 1000 रु. के नोट कानूनी रूप से वैध मुद्रा नहीं रहेंगे लेकिन अन्य करंसी नोट अर्थात 100 रु. , 50 रु. , 20 रु. और 10 रु. के नोट और सभी सिक्के वैध होंगे । सभी नकदी रहित लेनदेन जैसे कि चैक , कार्ड और डिमांड ड्राफ्ट यथावत जारी रहेंगे ।

रीयल एस्टेट सेक्टर , विशेषकर प्रोपर्टी की पुन बिक्री से संबंधित कारोबार पर इस निर्णय पर जबरदस्त असर होने की आशा है । बड़ी मात्रा में काले धन का जमावड़ा अलग - थलग पड़ जाने के कारण रियल्टी सेक्टर में कालेधन के जरिये होने वाले लेनदेन में कमी आने की उम्मीद है । इससे प्रोपर्टी के घटने और उद्योग में पारदर्शिता आने की उम्मीद की जा रही है जो कि दुर्भाग्य से कालेधन से सटा होने की संशयात्मक स्थिति हासिल कर चुका है । एक विशेषज्ञ के अनुसार आवास क्षेत्र में मूल्यों के अधिक न्यायोचित स्तरों पर नीचे आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है । तात्कालिक तौर पर यह क्षेत्र आवासीय और ज़मीन से जुड़े बाज़ार में भारी गिरावट के रुख के कारण लेनदेनों की मात्रा और संख्या के लिहाज से भारी दबाव में आ जायेगा ।

सरकार के लिये अगला कदम क्या होगा ?

सरकार और वित्तीय संस्थान भी उपभोक्ताओं के लिये आसान ऋण शर्तें और उच्चतर ऋण प्रवाह प्रदान करके ई - ट्रांजैक्शन के इस्तेमाल के संबंध में साख का निर्माण कर सकते हैं । कर संग्रह में मध्यम स्तर की वृद्धि होगी और बैंकों में जमाएं बढ़ेंगी । वित्त मंत्री ने कहा , ‘ ‘ भारत काले धन के साथ और अधिक समय तक नहीं रह सकता है । ईमानदारी , सत्यनिष्ठा और नैतिक आचरण भारत के विकास की आवश्यकतायें हैं । ’ ’

सरकार 2.5 लाख से अधिक की सभी नकदी जमाओं पर निगरानी रखेगी और यदि जमा राशि का कर विवरणिकाओं से मिलान नहीं होगा तो जमा की राशि पर कर वसूले जाने के अलावा 200 प्रतिशत की पेनल्टी लगाई जा सकती है ।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार , ‘ ‘ हम 10 नवंबर से 30 दिसंबर , 2016 तक हरेक खाते में जमा की गई 2 । 5 लाख से अधिक की नकदी राशि की रिपोर्ट प्राप्त करेंगे । विभाग इसका जमाकर्ताओं की कर विवरणिकाओं से मिलान करेगा और उपयुक्त कार्रवाई की जायेगी । ’ ’

यदि बड़ी मात्रा में धनराशि जमा की जाती है जिसका घोषित आय से मिलान नहीं होता है तो इसे कर चोरी का मामला माना जायेगा और आयकर अधिनियम के अनुच्छेद 270 ( ए ) के अनुरूप इस पर कर की राशि के साथ - साथ देय कर पर 200 प्रतिशत की पेनल्टी लगाई जायेगी ।

आयकर अधिनियम की धारा 270ए में यह प्रावधान है कि जानबूझकर प्राप्त आय को कम करके दजऱ् किया जाता है , कम दजऱ् की गई राशि के 200 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है । परंतु यदि यह कम आय दजऱ् किये जाने का मामला है , परंतु जानबूझकर नहीं किया गया है तो जुर्माने को अघोषित आय के 50 प्रतिशत तक किया जा सकता है ।

लेकिन 2.5 लाख रु. तक की नकद जमाओं की जांच नहीं की जायेगी और आम आदमी को जो कि ऐसी जमाएं करता है , परेशान नहीं किया जायेगा । लोगों को इस 1.5 लाख या 2 लाख तक की छोटी जमा राशियों को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है , क्योंकि यह कर योग्य आय से नीचे होगी । इस प्रकार की छोटी जमाओं पर आयकर विभाग की ओर से परेशान नहीं किया जायेगा ।

आने वाले महीनों में 1000 रु. के नोटों से शुरू करते हुए सभी मूल्यों के करंसी नोट अधिक सुरक्षा विशेषताओं के साथ पुन शुरू किये जायेंगे । नये नोट नये रंग संयोजन और डिज़ाइन वाले होंगे ।

विमुद्रीकरण का इतिहास

यह पहली बार नहीं कि भारतीय सरकारों ने करंसी नोटों का विमुद्रीकरण किया है । भारतीय रिज़र्व बैंक ने पहली बार जनवरी 1946 में 1000 रु. और 10 , 000 रु. के बैंक नोटों का विमुद्रीकरण किया था । 1954 में 1000 रु. , 5000 रु. और 10000 रु. के नोटों का प्रचालन फिर शुरू किया गया । लेकिन 1978 में एक बार फिर 1000 रु. , 5000 रु. और 10000 रु. का पुन विमुद्रीकरण कर दिया गया ।   1978 में तत्कालीन सरकार ने कहा कि इसका उद्देश्य कालेधन से निपटना था जो कि उस समय बहुत अधिक मात्रा में बढ़ गया था । यह कदम उच्च मूल्य बैंक नोट ( विमुद्रीकरण ) अधिनियम , 1978 को पारित करते हुए उठाया गया । कानून की प्रस्तावना में कहा गया था कि इस कानून में सार्वजनिक हित में कुछेक उच्च मूल्य के बैंक नोटों का विमुद्रीकरण और इससे जुड़े मामलों अथवा आकस्मिकताओं का प्रावधान है ।

यद्यपि उन दिनों में रु. 1000 बहुत बड़ी राशि होती थी , क्लर्क की आय 200 - 300 रु. होती है , अधिकारियों का वेतन रु. 500 - 1500 के बीच होता था और यहां तक कि भारत के राष्ट्रपति की आय मात्र 10 , 000 होती थी , जबकि बड़ी से बड़ी निगमों के प्रबंध निदेशकों का वेतन 5000 रु. होता था । उस समय ज़्यादातर भारतीयों ने अपने जीवनकाल में इस तरह का का कोई नोट कभी नहीं देखा होता था ।

 
सौजन्य रोजगार समाचार
( लेखक नई दिल्ली स्थित एक वरिष्ठ पत्रकार हैं । व्यक्त किये गये विचार उनके अपने हैं


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