PM Fasal Bima Yojana 2025 - खराब हुई फसल की शिकायत करें, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम पाएं


By Rajesh Kumar at  2025-10-02  at 12:58:20
PM Fasal Bima Yojana 2025 - खराब हुई फसल की शिकायत करें, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम पाएं
PM Fasal Bima Yojana 2025 - खराब हुई फसल की शिकायत करें, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम पाएं





PM Fasal Bima Yojana 2025: सभी किसान मित्रों को नमस्कार, जिस दिन हम यह लेख लिख रहे है इन दिनों बेमौसम बारिश का प्रकोप कुछ ज्यादा ही हो रहा है जिसकी वजह से पककर खड़ी फसलें व कटी हुई फसलें दोनों को नुकसान हुआ है। इसलिए इस लेख के माध्यम से हम आपको प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के बारें में वह सब जानकारी देने वाले है जिसकी मदद से आप इस नुकसान की भरपाई आसानी से कर सकते है।

क्योंकि दोस्तों प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम की मदद से आज के किसान अपने खेत में होने वाले नुकसान से कुछ हद तक बच जाते है। क्योंकि इस PM Fasal Bima Yojana 2025 से अगर किसी किसान को उसके खेत में किसी भी प्रकार की खेती का नुकसान होता है तो वो सरकार की तरफ से शुरू की गयी प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से क्लेम ले सकता है।

फ़िलहाल देश में लगभग 8 करोड़ किसान नियमित रूप से खेती करते हैं, लेकिन इनमें से केवल एक हिस्सा ही इस योजना के तहत बीमित है। हालाँकि सरकार समय - समय पर किसानों के हित के लिए बड़े फैसले लेती रहती है लेकिन जानकारी के अभाव से किसान इन लाभों को नही ले पाते है।

इसलिए इस लेख के माध्यम से आपको हम PM Fasal Bima Yojana 2025 से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले है जिसे समझकर आप भी अगर खेती करते है तो अपने आप को इस योजना में जरूर शामिल करें। इसके अलावा पहले से किया हुआ है तो फसल खराब होने पर अपना दावा दर्ज करना सीखें।

Pradhanmantri fasal bima yojana kab shuru hui?



भारत सरकार द्वारा 13 जनवरी, 2016 को शुरू की गई एक प्रमुख कृषि बीमा योजना (pm kisan fasal bima) है। जैसा की हमने पहले भी बताया है की इसका प्राथमिक उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण होने वाली फसल हानि के जोखिम से बचाना और उनकी आय को स्थिर करना है।

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना की प्रमुख विशेषताएं-



व्यापक कवरेज-



खतरे: बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, भूस्खलन, आग लगना, चक्रवात, तूफान, टिड्डी दल का प्रकोप, बीमारियाँ और कीट।

पूर्व-बुआई जोखिम: बुआई से पहले की स्थितियों (जैसे सूखा) के कारण बुआई न हो पाने पर भी कवरेज।

कटाई के बाद का नुकसान: कटाई के बाद साइक्लोन, भारी बारिश आदि से होने वाला नुकसान (अधिकतम 2 सप्ताह तक)।

स्थानीयकृत आपदाएँ: जैसे ओलावृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ जो कुछ विशिष्ट खेतों या गांवों को प्रभावित करती हैं।

कम किसान प्रीमियम-



खरीफ फसलें: किसान कुल प्रीमियम का केवल 2% भुगतान करता है (जैसे - धान, मक्का, सोयाबीन, कपास आदि)।

रबी फसलें: किसान कुल प्रीमियम का केवल 1.5% भुगतान करता है (जैसे - गेहूँ, चना, सरसों आदि)।

वाणिज्यिक/बागवानी फसलें: किसान कुल प्रीमियम का 5% भुगतान करता है।

शेष प्रीमियम: केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करती हैं (50:50 या 90:10 विशेष श्रेणी राज्यों में)। किसान द्वारा दिए गए प्रीमियम से अधिक की कोई कैपिंग नहीं है।

बीमा राशि-



बीमा राशि फसल के "अभिस्वीकृत लागत" (समर्थन मूल्य या बिक्री मूल्य नहीं) पर आधारित होती है। यह राज्यवार और फसलवार तय की जाती है। जैसे फसल को नुकसान कितना हुआ है उसी के आधार पर किसान को क्लेम की राशी दी जाती है।

PM Fasal Bima Yojana 2025 पात्रता और कवरेज-



किसान मित्रों आपको बता दे की इस योजना में वैसे तो जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड ले रखा है उन्हें आटोमेटिक जोड़ दिया जाता है। लेकिन फिर भी कई ऐसे किसान है जो ऋण नही लेते है उनको फसल बिमा की आधिकारिक वेबसाइट (https://pmfby.gov.in/) पर जाकर जुड़ना पड़ता है।

वहीँ कई लोगों के मन में यह भी सवाल होता है की अगर किसी किसान के जमीन नही है और वो फसल बिमा करवाना चाहता है तो किसान लीज पर ली गयी जमीन का भी फसल बिमा करवा सकता है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम की प्रक्रिया-



प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में फसल नुकसान की स्थिति में किसान अपना दावा (क्लेम) निम्न प्रक्रिया से कर सकते हैं:

नुकसान की सूचना देना-



फसल नुकसान होने के बाद किसान को 72 घंटे के भीतर फसल खराब होने की सूचना देना जरूरी है। इस सूचना को किसान कृषि रक्षक पोर्टल, संबंधित बीमा कंपनी के हेल्पलाइन नंबर, नजदीकी कृषि कार्यालय या बैंक में रिपोर्ट कर सकता है।

नुकसान का सर्वेक्षण-



बीमा कंपनी और संबंधित विभाग के अधिकारी फील्ड में जाकर फसल नुकसान का सर्वे करेंगे। और इस सर्वे के आधार पर नुकसान का सही आकलन किया जाता है।

क्लेम जमा करना-



किसान को नुकसान रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों के साथ क्लेम आवेदन जमा करना होता है। बीमा कंपनी ही क्लेम राशि की गणना कर उसका भुगतान किसानों के बैंक खाते में सीधे DBT के माध्यम से करेंगी। आपको बता दे की फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आधार पर फसल की उपज का वैज्ञानिक आकलन होता है और उसी आधार पर क्लेम राशि तय होती है। और क्लेम राशि किसानों को सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है।

इसलिए किसान को घटना के तुरंत बाद (आमतौर पर 72 घंटे के भीतर) बैंक/प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (PACS)/बीमा कंपनी/राज्य सरकार के अधिकारियों को सूचित करना चाहिए। जब आप यह दावा करते है तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार के अधिकारी क्षतिग्रस्त क्षेत्र का सर्वेक्षण करते हैं। और फिर आपकी फसल के नुकसान का आंकलन किया जाता है।

फसल बीमा योजना शिकायत कैसे करें-



किसान मित्रों इसके लिए आपको फसल खराब होने के 72 घंटे के अंदर नुकसान की सूचना स्थानीय कृषि कार्यालय, बीमा कंपनी, बैंक, या पीएमएफबीवाई की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन दर्ज करनी होती है। यदि आप ऐसा करना नही जानते है तो आपको प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शिकायत नंबर (14447) को डायल करना है।

फसल बीमा योजना शिकायत नंबर पर आपसे आपके आधार कार्ड के नंबर पूंछे जायेंगे जो आप बता देंगे तो आपकी फसलों का विवरण उनके पास मिल जाता है। जिसके बाद आप जो भी फसल जिस भी कारण से खराब हुई है उसकी रिपोर्ट दर्ज करवा सकते है।

फसल बीमा कैसे चेक करें?



PM Fasal Bima Yojana Claim दावा राशि सीधे किसान के बैंक खाते में अधिसूचित घटना की तारीख से अधिकतम 2 महीने के भीतर (स्थानीयकृत हानि के लिए) या फसल मौसम के अंत के 45 दिनों के भीतर (व्यापक हानि के लिए) भेज दी जाती है। हालांकी सच्चाई यह नही है की केवल 45 दिन के भीतर दावा राशी दी जाती हो कई - कई बार दावा राशी को बैंक अकाउंट में आने में 1 साल तक का समय भी लग जाता है।

अगर आप भी अपने फसल के दावे के क्लेम को चेक करना चाहते है तो आपको सबसे पहले फसल बिमा की आधिकारिक वेबसाइट (pmfby.gov.in) पर जाना है वहां पर आपको sign in करना है अपने आधार कार्ड से या फिर आपके मोबाइल नंबर से।

इसके बाद आप जब लॉग इन हो जाते है तो आपके सामने आपकी पोलिसी की सुचना दर्शाई जाती जहाँ आप वर्ष और खरीफ / रबी जो भी फसल हो उसे चुनकर अपने क्लेम की राशी जांच सकते है। यहाँ आपकी क्लेम की राशी पहले से कैलकुलेट की गयी होती है, जो आने वाले समय में आपके बैंक अकाउंट में भेजी जाती है। या पहले से भेजी जा चुकी है तो आपको इसका UTR नंबर भी दिखाया जाता है।





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