World Rabies Day 2025: Act Now: You, Me, Community


By Rajesh Kumar at  2025-09-22  at 17:54:35
World Rabies Day 2025: Act Now: You, Me, Community
World Rabies Day 2025: Act Now: You, Me, Community





World Rabies Day 2025: प्रतिवर्ष दुनियाभर में 28 सितम्बर के दिन विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। आपको बता दे की यह दिवस रेबीज नामक जानलेवा वायरल बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उसकी रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है। हर वर्ष विश्व रेबीज दिवस को एक अलग थीम के साथ मनाया जाता है उसी कड़ी में world rabies day 2025 theme - "Act Now: You, Me, Community" यानी व्यक्ति, समुदाय और मिलकर तुरंत कार्रवाई करने का आह्वान रखी गयी है।

हमारे देश में सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक "रेबीज मुक्त भारत" बनाने का लक्ष्य रखा है। इस दिवस (world rabies day in hindi) को मनाने का उद्देश्य लोगों को कुत्ते और अन्य जानवरों के काटने से होने वाले संक्रमण, टीकाकरण और समय पर चिकित्सीय उपचार की जानकारी देना है ताकि रेबीज को रोका जा सके और इससे होने वाली मौतों को समाप्त किया जा सके।

रेबीज के बारें में-



दोस्तों रेबीज एक जानलेवा संक्रामक रोग है जो ज्यादातर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। यह वायरस मनुष्यों समेत सभी स्तनधारी जीवों को प्रभावित करता है। इस रोग के शुरुआती लक्षणों में बेचैनी, बुखार, मांसपेशियों में ऐंठन, मतिभ्रम, मतली और उल्टी शामिल होते हैं। इसके बाद गम्भीर मामलों में तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है और अंततः मृत्यु हो जाती है।

हमारे देश में रेबीज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। वर्ष 2024 में कुत्ते के काटने के लगभग 22 लाख केस दर्ज हुए थे और इन मामलों में लगभग 20% बच्चे (15 वर्ष से कम उम्र) थे। इसलिए भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक "रेबीज मुक्त भारत" बनाना है। इसके लिए मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को जोड़कर "वन हेल्थ अप्रोच" अपनाई जा रही है जिसमें व्यापक टीकाकरण, नसबंदी, और जागरूकता अभियानों पर जोर दिया जा रहा है।

कुत्तों में रेबीज के लक्षण-



कुत्तों में रेबीज के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और तीन मुख्य चरणों में विकसित होते हैं, जो निम्नलिखित प्रकार से है:

1. शुरुआती लक्षण-



• कुत्ते में सुस्ती और कमजोरी महसूस होना

• खाने-पीने में कमी आना

• गर्दन या शरीर की मांसपेशियों में अकड़न

• चलने-फिरने में असामान्यता और असंतुलन

• व्यवहार में बदलाव, जैसे अचानक चिड़चिड़ापन या उल्टा पहल करना

2. तेज लक्षण-



• अत्यधिक आक्रामकता या अचानक डर जाना

• कुछ-कुछ जानवरों या इंसानों पर अजीब तरह से प्रतिक्रिया करना

• लार टपकाना (अत्यधिक लार आना)

• गंदगी या पत्थर जैसे अवश्यक वस्तु खाना

• पानी से डर लगना

• भौंकने या आवाज़ में बदलाव आना

• चलने-फिरने में कमजोर पड़ना

3. अंतिम चरण-



• जबड़े में अकड़न और निगलने में कठिनाई

• शरीर का लकवा लगना, पक्षाघात होना

• दौरे पड़ना

• अत्यधिक कमजोरी और बेहोशी

उपरोक्त सभी लक्षण रेबीज के वायरस के कुत्ते के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने के कारण होते हैं, जो व्यवहार और शारीरिक समन्वय दोनों को बिगाड़ देते हैं। यदि आपको इन सब लक्षणों में से कोई एक दिखे तो आप सचेत रहे। और किसी भी संदिग्ध लक्षण पाए जाने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

कुत्ते के काटने पर कितने दिन बाद रेबीज फैलता है?



चिकित्सक बताते है की, कुत्ते के काटने के बाद रेबीज वायरस शरीर में फैलने में आमतौर पर 1 से 3 महीने का समय लेता है। यह समय "इंक्यूबेशन पीरियड" कहलाता है। कुछ मामलों में यह अवधि 1 हफ्ते से लेकर 1 वर्ष तक भी हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वायरस काटे गए स्थान से मस्तिष्क तक कितनी दूर है और व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कैसी है।

इसलिए कुत्ते के काटने के बाद जितनी जल्दी हो सके, खासकर पहले 24 से 72 घंटे के भीतर, एंटी-रेबीज टीका लगवाना अत्यंत जरूरी है। क्योंकि लक्षण दिखाई देने के बाद रोग लगभग 100% घातक होता है। और अंत में व्यक्ति को अपनी जान गवानी पड़ती है।

क्या सभी कुत्तों में रेबीज होता है?



सबसे पहले तो आप यह बात समझें की, रेबीज तब होता है जब कुत्ता किसी संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आता है, खासकर काटे जाने या खरोंच के जरिए। केवल वही कुत्ते रेबीज से संक्रमित होते हैं जो वायरस की लार में मौजूद रोगजनक के संपर्क में आते हैं।

इसलिए, सभी कुत्ते रेबीज के त्वचा या पैर की चोट से संक्रमित नहीं होते, यह संक्रमति संपर्क पर निर्भर करता है। यदि पालतू कुत्तों में नियमित रूप से रेबीज का टीकाकरण कराया जाता है, तो उनकी संक्रमित होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। इसलिए सम्भव हो तो आवारा एवं पालतू दोनों प्रकार के कुत्तों से सम्भलकर रहे और समय - समय पर इनके लक्षणों की जांच करते रहे।





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