Essay on diwali in hindi: प्रिय विद्यार्थियों प्रतिवर्ष दीपावली, जिसे "प्रकाश का त्योहार" कहा जाता है, हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है जो देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए आपके विद्यालय द्वारा लगभग 10 दिनों तक का अवकाश भी आपको दिया जाता है। जिसमे आपसे होमवर्क में दीपावली पर निबंध (essay on diwali) भी पूछा जाता है।
इसलिए यहाँ हम आपको दीपावली का निबंध (diwali festival essay) और इस त्यौहार से जुड़े सभी जरूरी बातें बता रहे है, जो आपके लिए जानना बेहद आवश्यक है:
इस त्यौहार को दीपावली या दीवाली दोनों नाम से जाना जाता है, यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। "दीपावली" शब्द संस्कृत के दो शब्दों "दीप" (दिया) और "आवली" (श्रृंखला) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "दीयों की पंक्ति"। यह त्योहार प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन पूरा भारत दीयों की रोशनी, रंगोली, पटाखों, मिठाइयों और उल्लास से जगमगा उठता है।
दीपावली बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश, और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है। यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर महीने में। ऐसी मान्यता है की, इस दिन भगवान श्री रामचंद्र 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे और अयोध्यावासियों ने स्वागत में दीप जलाए थे।
इसके अलावा दिवाली (diwali essay 10 lines) को लेकर और भी कई ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है जो इस प्रकार है:
महालक्ष्मी की पूजा: एक अन्य मान्यता यह है कि इसी दिन समुद्र मंथन के बाद धन और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए, लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके अपने घर में धन और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
भगवान विष्णु द्वारा नरकासुर का वध: एक पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने अत्याचारी दैत्य नरकासुर का वध किया था, जिससे लोगों को उसके अत्याचार से मुक्ति मिली। इस विजय के प्रतीक के रूप में दीपावली मनाई जाती है।
महावीर स्वामी का निर्वाण: जैन धर्म के अनुयायियों के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। इसी दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को मोक्ष (निर्वाण) की प्राप्ति हुई थी।
सबसे पहले तो आपको बता दे की दीपावली से पहले, धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली), दिवाली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज नामक कुल पाँच दिन के त्योहार मनाए जाते हैं। दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज पर समापन होता है। जो पांच दिन है उनके महत्व इस प्रकार है:
धनतेरस: इस दिन नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन धन्वंतरी देव प्रकट हुए थे। लोग सोना-चांदी खरीदते हैं।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। सुबह स्नान आदि करके शरीर की शुद्धि की जाती है।
दीपावली (मुख्य पर्व): इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं। शाम को देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घरों, दुकानों और मंदिरों को दीयों और रोशनी से सजाया जाता है। लोग एक-दूसरे के घर मिठाइयाँ बाँटते हैं और आतिशबाजी करते हैं।
गोवर्धन पूजा/अन्नकूट: इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र के क्रोध से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया था। लोग गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा करते हैं और अन्नकूट (विभिन्न प्रकार के भोजन) का प्रसाद बाँटते हैं।
भाई दूज: यह त्योहार भाई-बहन के प्यार को समर्पित है। बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए आरती उतारती हैं और तिलक लगाती हैं, जबकि भाई उन्हें उपहार देते हैं।
जैसे ही दिवाली का त्यौहार आता है सबके मन में ख़ुशी की लहर दोड़ जाती है और लोग अपने घरों की साफ-सफाई, रंगाई, और सजावट कई दिन पहले से शुरू कर देते हैं। इसके बाद घरों में रंगोली, दीपक, मोमबत्तियाँ, झालर और फूलों से सजावट होती है। और यह सब कर लेने के बाद ही देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है।
ऐसा माना जाता है की, अगर कोई घर को साफ़ सफाई न करके और न ही सजावट करता है तो उसके घर देवी लक्ष्मी नही आती है। और वह व्यक्ति पुरे वर्ष तक आर्थिक तंगी से जूझता रहता है। शायद इसलिए दिवाली के त्यौहार का एक ये भी फायदा है की पुरे घर में साफ़ सफाई भी हो जाती है जहाँ रोजाना नही होती उस कोने में भी सफाई देखने को मिलती है। जिससे बिमारियों का खतरा कम हो जाता है।
हम सब देखते है की, वर्तमान समय में पटाखों के अत्यधिक उपयोग से वायु और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि हुई है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए हमें पटाखों का सीमित उपयोग करना चाहिए और हरे रंग के (पर्यावरण के अनुकूल) पटाखों को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, दीयों की रोशनी से आग लगने का खतरा बना रहता है, इसलिए सतर्कता बरतनी अत्यंत आवश्यक है।
इस दिन पटाखों के शोर शराबे से आस-पास के पालतू जानवरों और बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखें। इसके अलावा घरों में दीये/मोमबत्तियाँ पर्दों, कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर ही जलाएँ, और इन्हें समतल सतह पर रखें। वरना यह आग भी पकड़ सकते है।
दीपावली का त्योहार यह सिखाता है कि हमें अच्छाई और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए तथा अंधकार को दूर कर ज्ञान और प्रेम का प्रकाश फैलाना चाहिए। यह त्यौहार हमें आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम और एकता के साथ रहने का संदेश देता है। हमें इस पावन पर्व का वास्तविक अर्थ समझते हुए इसे पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाना चाहिए। आइए, इस दीपावली हम अंधकार को दूर करने का और अपने हृदय में प्रेम, दया और उदारता का दीया जलाने का संकल्प लें।